Kandeel, part,20

 



कंदील की समझ में नहीं आ रहा था।

कि वह क्या करें सैफ की धमकी से वह लगभग डर चुकी थी? 

वह नहीं चाहती थी ।

कि सैफ उसकी किसी फैमिली मेंबर को नुकसान पहुंचाए।

कंदील ने  सोच लिया था।

कि यह बात अब हद से पर हो गई है ।

उसे अपने बड़ों को यह बात बता देना चाहिए। 

लेकिन उससे पहले लाएबा से इस बात का जिक्र करना बेहतर है। 

कंदील सोचने लग गई थी।

कंदील ने दूसरे दिन सारी बात लाएबा को बता दी थी। 

लाएबा को भी सैफ से इस तरह की उम्मीद नहीं थी।

के वो  गुंडे बदमाशों की तरह उसकी हवेली में 

दाखिल होगा?

इसलिए उससे डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है ।

वह सिर्फ तुम्हें धमका रहा  और डराने के लिए ऐसा कर रहा है। 

उसकी इतनी मजाल नहीं है। 

की नवाब साहब की खानदान में किसी को हाथ भी लगा सके।

और अभी अगर किसी बड़े को तुम यह बात बताओगे। तो  बात बहुत  ज्यादा ही फैल सकती है। 

लाएबा ने कन्दील को अपनी तरफ से समझने की कोशिश की।

मगर लाएबा सैफ ने आज ऐसी हरकत की है अगर कल उसने इससे भी बूरी हरकत की फिर मैं क्या करूंगी?

कंदील को डर था।

  उस सैफ की हरकतें हद से ज्यादा पार हो रही थी।

अरे यार कंदील इतना मत डरो ,डरने की बिलकुल जरुरत नहीं कुछ नहीं कर सकता है ।

वह सिर्फ तुम्हें डरा रहा है।

ताकि उसके डर से तुम 

उससे शादी कर लो। 

इतनी हिम्मत नहीं है उसमें के कुछ कर सके?

लाएबा बोली।

लाएबा के समझाने से वह मुतमईन तो हो गई थी।

बजाहिर वो अंदर से बहुत डरी हुई थी। 

सैफ के लफ्ज उसके कानों में बार-बार गूंज रहे थे। 

वह सोच रही थी कि। 

सैफ कुछ ऐसा ना कर दे, जिससे उसकी फैमिली मेंबर को नुकसान पहुंचे।

कंदील ,कंदील ,

कंदील की माजी की यादे लंबी ही होती जा रही ।

कंदील और भी बहुत कुछ सोचने लगती ,अगर लाएबा उसे आकर आवाज ना लगती।

लाएबा के आवाज लगाने पर

कंदील अपने पुराने सफर की लंबी दौड़ से वापस निकली थी।

ओहहह

कंदील  ने अपने माथे पर हाथ रखते हुए कहा।

क्या हुआ कंदील इतनी परेशान क्यों हो तुम?

लाएबा कंदील के नजदीक बैठते हुए बोली। 

आप जानती हो लाएबा मेरी परेशानी की वजह क्या हो सकती है?

सारी हवेली वालो की तरह आप भी इस हकीकत से अच्छी तरह वाकिफ है। 

वह क्या कहना चाह रही थी लाएबा उसकी बात अच्छी तरह समझ रही थी?

घबराओ नहीं कंदील सब ठीक हो जाएगा। 

आगा जान सब कुछ ठीक कर देंगे भरोसा रखो।

लाएबा ने उस के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

हां अल्लाह से यही उम्मीद है ।

कि वह सब बेहतर करेगा मेरे साथ में।

कंदील बोली।

लाएबा प्लीज एक अप चाय दे दीजिए मुझे ।

नहीं तो मैं हॉस्पिटल के लिए लेट हो जाऊंगी। कंदील ने घड़ी पर नजर डालते हुए कहा।

क्या मतलब लेट हो जाएगी कंदील ।

अभी तो सिर्फ 8:00 बज रहे हैं? 

और तुम तो हॉस्पिटल 10:00 के बाद जाती हो ना।

लाएबा बोली।

जी हां लाएबा जाती तो मैं 10:00 के बाद ही हू। 

मगर एक हिटलर टाइप सीनियर डॉक्टर हॉस्पिटल में आए हैं। डॉक्टर बख्श 

उन्होंने पनिशमेंट दिया हैं मुझे। 

इसलिए मुझे और डॉक्टर से  2 घंटे पहले हॉस्पिटल पहुंचना है। 

कंदील ने कहा।

ओहहहहह ये बात है।

लाएबा ने अपने होठ सुकेडते हुए कहा।

ठीक है तो मैं नाश्ता यही लेकर आ जाती हूं ।

तुम नाश्ता करके जाना।

लाएबा ने बड़े प्यार से कंदील के सर पर हाथ फेरते हुए कहा। 

नहीं लाएबा मेरा कुछ खाने का मन नहीं कर रहा है ।

आप सिर्फ एक कप चाय ला कर दे दीजिए वह भी इसलिए क्योंकि सर में बहुत दर्द हो रहा है? 

कंदील ने अपने सर को दोनों हाथों से पकढ़ते हुए कहा। कल रात से लगातार सोचने के बाद उसका सर बहुत बुरी तरह दुख रहा था।

उसकी हिम्मत तो नहीं थी किसी भी तरह हॉस्पिटल जाने की। 

बट डॉक्टर बख्श के डर से उनकी पनिशमेंट के डर से। उसे हिम्मत करनी पड़ी थी।

और वैसे भी कल के एब्सेंट थे उसके लिए आज एक पनिशमेंट और भी तैयार थी।

कंदील सोच रही थी।

क्योंकि डॉक्टर बख्श किसी को भी बख्शते नहीं थे? फिर कंदील को कैसे छोड़ सकते थे?


कंदील जैसे ही अस्पताल में आई वह अपने केबिन में अभी बैठी ही थी।

की डॉक्टर फरहान की कॉल आ गई।

डॉ कंदील आपको अभी इसी वक्त डॉ बख्श अपने केबिन में बुला रहे हैं। 

फरहान ने कन्दील की बिना कोई  बात सुने कॉल काट दी थी।

अल्लाह यह डॉक्टर बख्श तो मुझे हार्ट अटैक करवा कर ही मानेंगे। 

कंदील कहते हुए अपने चेयर से उठी।

उसने अपने पर्स को  अपने कंधे पर टंगा ।

और  जल्दी ही डॉक्टर बक्श के केबिन में जाने के लिए तेज तेज कदम बढ़ाने लगी।

क्योंकि अगर एक सेकंड भी लेट हो जाती?

फिर एक पनिशमेंट उसके लिए तैयार रहती।

अल्लाह तू बस उस हिटलर को संभाल लेना कंदील डॉक्टर बख्श के बेरे मे सोचते हुए दिल ही दिल में दुआ करने लगी।

अल्लाह तू रहम फरमाना।

कंदील ने दिल में सोचती हुए।

केबिन के बाहर खड़े होकर कहा ।

मैं आई कम इन ।

अंदर से बिना देर किए ही ।

यस कमिंग ,की आवाज आ गई।

जिससे अंदाजा लगाया जा सकता था कि डॉक्टर बख्श शिद्दत से कंदील का इंतजार ही कर रहे थे।

सर आपने मुझे बुलाया।

कंदील ने अंदर आकर कहा।

  डॉक्टर बख्श किसी केस की स्टडी करने मे मसरूफ  थे। वह फाइल को बहुत ध्यान से पढ़ रहे थे।

सिट डाउन उन्होंने चेयर की तरफ इशारा करते हुए कहा। नजर अभी भी फाइल पर ही लगी हुई थी।

कंदील ने भी इरादा ही डॉक्टर बख्श की तरफ देखा।

आज ना तो उनके चेहरे पर मार्क्स लगा हुआ था। 

और ना ही उनका चेहरा फाइल से ढका हुआ था

काफी हैंडसम थे डॉक्टर बख्श।

हल्का बड़ा हुआ शेव सुर्ख साफ रंगत और बेहद सीरियस मिजाज उनकी पर्सनालिटी को सूट करता था।

कंदील उनको देखकर चौंक गई थी।

सो डॉक्टर कंदील कल कहां थी आप?

अस्पताल से गैर हाजिर होने की कोई वजह नहीं बताई आपने। 

जबकि आपको पता है। 

गैर हाजिर होने से पहले अस्पताल को इत्तिला दे देनी चाहिए।

कि किस वजह से आप गैर हाजिर हुई हैं।

डॉ बख्श अभी भी फाइल पर नजर दौड़ाते हुए कहा।

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