Kandeel, part, 35

 



चलिए मेरे साथ गाड़ी में बैठीए है।

डॉ बख्श ने हुकुम सुनते हुए कंदील से कहा।

पर मैं आपके साथ गाड़ी में क्यों बैठू डॉक्टर बख्श? कंदील ने पूछा।

इसलिए डॉक्टर कंदील, की आपको भी इस कैंप में जाना है जिस कैंप में मुझे जाना है।

डॉ बक्श ने कन्दील का जैहन दुरुस्त करते हुए कहा।

जी हां सर मैं जानती हूं, कि मुझे भी वही जाना है ।

लेकिन मुझे बस से जाना था, वह बस जा चुकी है।

कंदील ने दो टूक लहजे में जवाब दिया।

मैं जानता हूं आपकी बस में जा चुकी है ।

इसीलिए मैं आपसे बोल रहा हूं, कि आप मेरे साथ गाड़ी में चलीए है।

डॉ बख्श ने कहा।

सॉरी डॉक्टर बख्श,बट मैं आपके साथ गाड़ी में नहीं बैठ कर जा सकती।

कन्दील  ने बहुत ही रूड बिहेवियर में कहा।

और मुंह दूसरी साइड पर फेर लिया।

कंदील अगर तुम यह नहीं चाहती हो ,कि यहां बस स्टॉप पर मैं तमाशा खड़ा करूं। 

तो चुपचाप मेरे साथ गाड़ी में चल कर बैठ चलो।

डॉक्टर बख्श ने वार्निंग भरे लहजे में कंदील से कहा।

मगर कंदील अभी तक अपनी जगह से हिली भी नहीं थी उसका मुंह अभी भी दूसरी साइड पर था।

ओ के बेबी फाईन, तुम ऐसे मानने वाली नही हो।

डॉ बक्श ने अपने दिल में सोचा।

और आकर बिल्कुल, कंदील के नजदीक बैठ गए। 

जिस तरफ कंदील का मुंह था उस तरफ।

वह बिल्कुल कंदील के नजदीक बैठ गए थे ।

फासला दोनों में ना के बराबर था।

कंदील का मुंह डॉक्टर बख्श के सीने को टच कर रहा था।

कंदील को इल्म नहीं था, कि वह ऐसी हरकत कर सकते हैं।

यह क्या हरकत है सैफ?

कंदील ने अपनी काली-काली नाराजगी भरी नजरों से डॉक्टर बख्श की तरफ देखते हुए कहा।

डॉक्टर बख्श के चेहरे पर स्माइल आ गई। 

क्योंकि कंदील ने उन्हे सैफ कहा था?

यह उनका वह नाम था।

जिसे अब उन्हें बहुत ही कम लोग बुलाते थे। 

जो उनके खास और अपने थे।

माई डियर स्वीट वाईफ😘 चल कर गाड़ी मे बैठ जाईए ।

नहीं तो हमें वहां पहुंचने में देर हो जाएगी।

डॉ बख्श ने कंदील के कान के नजदीक आकर

कहा था।

और इसी हरकत से कंदील बहुत घबराती थी।

डॉक्टर बख्श प्लीज दूर हटिए कंदील झेप गई थी।

डॉक्टर बख्श की इस हरकत से।

और डॉक्टर बख्श को हसी आ थी कंदील को देख कर 

ओ के?चलिए ।

कंदील अपने पैर पटकती हुई उठी थी।

कंदील ने उनके आगे हथियार डालते हुए कहा।

क्योंकि कंदील अच्छी तरह जानती थी।

  वह पीछे हटने वालों में से नहीं है?

एक बात का ऐहद कर लिया ,तो डॉक्टर बख्श उस बात को पूरा करके ही मानेंगे।

कंदील ने गुस्से से गाडी का दरवाजा खोला, और गाड़ी मे बैठ गई। 

डॉक्टर बख्श भी आकर ड्राइविंग सीट पर बैठ गए थे। 

उन्होंने गाड़ी स्टार्ट कर दी।

उन्होंने  तिरछी निगाह करके कंदील की तरफ देखा।

कंदील डॉक्टर बख्श  ,की तरफ से रुख मोड़ कर दरवाजे की तरफ देख रही थी।

डॉक्टर बख्श ने मुस्कुरा कर अपनी निगाह सामने की तरफ कर लिया। 

वो अच्छी तरह से जानते थे कि कंदील उनसे कितनी खफा है। 

और वह इतनी आसानी से मानने वालों में से नहीं थी।


ना चाहते हुए भी कंदील को डॉक्टर बख्श की गाड़ी में उनके साथ बैठना पड़ा था। 

कंदील को डॉक्टर बख्श के ऊपर बहुत तेज गुस्सा आ रहा था। 

क्योंकि वह जब चाहे  जैसे चाहे अपनी मनमानी और अपनी जिद करते हैं?

  डॉक्टर बख्श ने गाड़ी में हल्की सी म्यूजिक ऑन कर दी थी।

डॉक्टर बख्श को इस वक्त कंदील का साथ बहुत अच्छा लग रहा था।

जो इतने दिनो से वह कंदील के लिए अपने दिल में नफरत लिए बैठे थे।

एक पल में वह नफरत कहीं चली गई थी।

आई एम सॉरी ,कन्दील मैंने तुम्हें बहुत हर्ट किया है।

एक दम  से ये अल्फाज कंदील के कानों में पड़े थे। 

कंदील ने बिना यकीन किये डॉक्टर तरफ डॉक्टर बख्श की तरफ मुड़कर देखा।

यह मेरी गलतफहमी है, या आपने सच में मुझसे सॉरी कहा। 

कंदील को यकीन नहीं हो रहा था, इस बात पर के डॉक्टर बख्श  उससे सॉरी बोल सकते हैं।

सॉरी कंदील हर उस बात के लिए जिससे तुम हर्ट हुई हो जिससे मेरी वजह से तुम्हारा दिल दुखा है।

डॉक्टर बख्श, ने कंदील की तरफ देखते हुए मुस्कुराकर कहा।

वो इस तरह प्यार भरी निगाह से कंदील को देख रहे थे के कंदील को अपनी नजरे झुकाना पड़ गई। 

कंदील खामोश हो गई उसने कुछ नहीं कहा।

वह इतनी आसानी से डॉक्टर बख्श को कैसे माफ कर सकती थी?

डॉक्टर बख्श  ने उसके साथ बहुत ही गलत किया था। सबसे पहले तो डॉक्टर बख्श ने उसके अपनों को दर्द देकर, उसे दर्द दिया था। 

और फिर जबरदस्ती कंदील से शादी की थी।

इतना आसान नहीं था कंदील का डॉक्टर बख्श को 

माफ करना।

कंदील मुझे अपनी हर गलती का एहसास है।

और तुम जो चाहे उस गलती के लिए मुझे सजा दे सकती हो, मैं तैयार हूं।

तुम्हारी हर पनिशमेंट के लिए।

यह ऐसे लफ्ज थे, जो कंदील के कानों में शहद घोल रहे थे। 

और इन लफ्जों का कंदील पर बहुत असर हो रहा था।

कंदील डॉक्टर बख्श की बातो से पिघल रही थी।

मगर आज वह खामोश थी।

उसने कुछ नहीं कहा।

बस उन लफ्ज को खामोशी के साथ सुन रही थी।

सैफ साहब क्या सच में सब कुछ इतना आसान है?

इन 6 सालों में जितनी तकलीफ मुझे हुई है।

उस तकलीफ का एक गुना हिस्सा भी आप बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं ।

डॉक्टर बख्श

कंदील ने शिकवा भरी नजरों से डॉक्टर बख्श की तरफ देखा।

काफी देर बाद कंदील ने ये लफ्ज कहे थे।

यह तुम्हारी सोच है कन्दील , जितना दर्द तुमने बर्दाश्त किया है।

उससे बढ़कर दर्द मैंने भी बर्दाश्त किया है।

तुम्हारी जुदाई का दर्द,कंदील

इस बार शिकवा भरी नजरों से डॉक्टर बख्श ने कन्दील की तरफ देखा था। 

और इस तरह से डॉक्टर बख्श का कंदील की तरफ देखना ।

कंदील को अपनी नजर झुकने पर मजबूर कर गया था। क्योंकि इन सब चीजों में गलती सिर्फ डॉक्टर बख्श की ही नहीं थी।

कंदील की भी थी?

कंदील तुम नहीं समझ सकती ,प्यार में जुदा होने का दर्द क्या होता है?

अपने महबूब से जब अलग हो जाते है। 

कितना कांटो भरी इस राह पर चलाना पड़ता है, खुद को। डॉक्टर बख्श की आंखें एकदम से लाल हो गई थी।

तुम सोच भी नहीं सकती,  कि तुम्हारी उस सजा ने, तुम्हारे एक थप्पड़ ने मेरी पूरी लाइफ को चेंज करके रख दिया था  डॉ बख्श बोले

हा मै मानता हूं कि गलती मेरी थी। 

लेकिन जिम्मेदार तुम भी थी उस गलती की कंदील। 

डॉ बक्श  के बोलने  से महसूस हो रहा है कि काफी लंबे वक्त का सफर तय करके डॉक्टर बख्श अब वापस आए थे।।

कंदील ने कोई जवाब नहीं दिया।

बस खामोश हो गई। 

क्योंकि डॉक्टर बख्श के लफ्जों में काफी सच्चाई महसूस हुई थी कंदील को?

अगर गलत डॉक्टर बख्श थे तो सही कंदील

भी नहीं थी।

कंदील को अपनी फैमिली के सामने डॉक्टर बख्श की मोहब्बत दिखाई नहीं पड़ी थी।

कंदील डॉक्टर बख्श की मोहब्बत को इग्नोर करती  आई थी।

बट कंदील ,अब मैं  तुमसे और अलग नहीं रह सकता जितनी सजा तुम्हें देनी थी ,तुमने दे दी, है मुझे।

इससे ज्यादा  सजा मैं नहीं काट सकता।

डॉ बख्श ने एकदम गाड़ी को रोकते हुए कहा।

आपने गाड़ी क्यों रोक दी डॉक्टर बख्श?

कंदील ने हैरान होते हुए डॉक्टर बख्श की तरफ देखकर कहा।

इसलिए कंदील क्योंकि जिस रास्ते का सफर हम तय कर रहे थे? 

उसकी मंजिल आ चुकी है।

न जाने क्या कहना चाहते थे डॉक्टर बख्श?

कंदील ने कुछ लम्हे डॉक्टर बख्श की आंखों में देखा। जहां सिर्फ उसके लिए प्यार ही प्यार था। 

और दूसरे ही लम्हा अपनी नजरों को झुका लिया।

आज डॉक्टर बख्श कंदील को बहुत ज्यादा सीरियस नजर आ रहे थे।


 



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