Kandeel, part, 34
कंदील की ऐसी बातों से डॉक्टर बख्श को सोचने पर मजबूर कर दिया था।
डॉक्टर बख्श बस उसकी बातों पर ही ध्यान कर रहे थे। उन्हें कंदील की बातें सही नजर आ रही थी।
कंदील अब उन्हें कहीं से गलत नहीं लग रही थी।
मगर इस वक्त कंदील को समीर के साथ अस्पताल की कैंटीन में चाय पीता हुआ देखकर डॉक्टर बख्श को बहुत तेज गुस्सा आने लगा था।
वह कंदील को किसी और के साथ देखना गवारा नहीं कर सकते थे।
और करते भी क्यों आफ्टर और वह उनकी वाइफ थी?
कोई भी अपनी वाइफ को किसी और के साथ बर्दाश्त नहीं कर सकता ।
और वह भी हंसते हुए खिलखिलाते हुए देखकर बात करना तो उसके शौहर के तन-बदन में आग लगा सकती थी।
और यही हाल इस वक्त डॉक्टर बख्श का भी हो रहा था उन्होंने कंदील को डॉक्टर समीर के साथ हंसते हुए बात करते हुए देखा था।
तो उन्हें बहुत तेज गुस्सा आ रहा था
उनका मन कर रहा था, कि डॉक्टर समीर को वहां से खींच कर दो थप्पड़ उनके मुंह पर लगाए।
जब उनकी बर्दाश्त से बाहर हो गया तब उन्होंने उसको कॉल कर दिया।
डॉक्टर बख्श 6 साल पुरानी हुई हर बात का हर पॉइंट नोट कर रहे थे।
इन 6 सालों में आज पहली मर्तबा उनको एहसास हो रहा था कि उन्होंने कंदील के साथ कितना गलत किया था।
उन्हें उस वक्त खुद के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा था। उस वक्त उन्हें गलत भी गलत नहीं लगा था।
उन्होंने सारे वह काम कर दिए थे ।
जिससे एक लड़की दूसरे शख्स से किसी भी तरह दूर जाने के लिए तैयार हो सकती है।
कंदील को पाने के खातिर ही, उन्होंने कंदील को खो दिया था।
उन्होंने नहीं सोचा था, इतनी बारीकी से, के वो कन्दील के लिए इस हद तक पहुंच जाएंगे?
और इतना गलत कर देंगे।
और डॉक्टर बख्श सोच रहे थे, कि वह अपनी गलती का खामियाजा अदा करने के लिए तैयार है।
जो फैसला भी कंदील करेगी उसके लिए
डॉक्टर बख्श तैयार है।
कंदील से डॉक्टर बख्श को शदीद मोहब्बत थी।
उसकी मोहब्बत के खातिर वह कुछ भी करने को तैयार थे।
आज भी उनकी मोहब्बत की कोई इम्तिहान
नहीं थी।
डॉ बख्श जब सारी बातों पर सोच चुके थे ।
वह एक फैसले पर पहुंचे थे, उन्होंने सोच लिया था।
के आगा जान से मिलकर और हवेली के सारे लोगों से मिलकर माफी मांग लेना चाहिए?
सबसे बड़े मुजरिम तो वह कंदील के थे।
लेकिन उससे पहले उन्हें हवेली और आगा जान से अपनी गलतियों की माफी मांगनी थी।
और उन्होंने सोच लिया था, कि वह जल्द से जल्द इस काम को अंजाम देंगे।
अस्पताल के सारे डॉक्टर कैंप में जाने के लिए तैयारी कर रहे थे।
इस अस्पताल की तरफ से हर महीने एक कैंप लगाया जाता था।
जिसमें गरीबों का फ्री ट्रीटमेंट होता था, और उनको दवाइयां भी फ्री में दी जाती थी।
और सारे ही डॉक्टर बहुत एक्साइटेड रहते थे इस कैंप में जाने के लिए।
यू तो डॉक्टर बख्श पहली मर्तबा इस कैंप में जाने वाले थे।
लेकिन सारी चीज ही उन्होंने अपनी नजरों के दरमियान। करवाई थी ।
सारी चीजों को वह खुद ही देख रहे थे ।
किसी भी असिस्टेंट या सीनियर डॉक्टर को उन्होंने नहीं कहा था की पूरी डिटेल स्कैन के बारे में।
इसलिए इस वक्त सारे डॉक्टर खौफ में थे, कि अगर छोटी-मोटी भी किसी से गलती हो गई ।
तो यह डॉक्टर बख्श है ,जो किसी को बक्शते ही नहीं है। कहीं इस कैंप में भी ऐसा ही ना हो जाए, और कोई भी डॉक्टर यह नहीं चाहता था कि छोटी-मोटी थी भी गलती किसी डॉक्टर से हो।
लेकिन उस दिन के बाद से कंदील का डर डॉक्टर बख्श के लिए बिल्कुल दिल से निकल चुका था।
क्योंकि कन्दील समझ चुकी थी कि डॉक्टर बख्श कौन इंसान है?
और इस बार जल्दी आने के बावजूद भी ऐसा हुआ था।
सारे डॉक्टर्स जिस बस मे बैठे थे वो डॉक्टर्स की बस जा चुकी थी।
और कंदील वही बस स्टॉप पर खड़ी रह गई थी।
कंदील ने डॉक्टर समीर को फोन किया, बेल जा रही थी लेकिन फोन नहीं उठा रहा था।
फिर कंदील ने डॉक्टर इकरा को फोन किया, वहां पर भी यही हुआ की बेल तो बज रही थी।
लेकिन फोन नहीं उठ रहा था।
शायद बस में सब लोगों के शोर की वजह से ऐसा हो रहा था।
सो सैड
कंदील का मूड बहुत बुरी तरह ऑफ हो चुका था।
वह वही, बस स्टॉप पर लगी बेंच पर बैठ गई थी।
वह सोच रही थी, कि अब वह उस कैंप तक कैसे पहुंचेगी? वह दोनों हाथों को अपने बालों पर लगाते हुए हेड डाउन करके बैठ गई।
कंदील को हेड डाउन करे हुए अभी कुछ ही मिनट हुए थे।
के गाड़ी के होर्न की आवाज बिल्कुल उसके नजदीक से आई।
उसने कोई हरकत नहीं कि, वह बस वैसे ही बैठी रही।
लेकिन गाड़ी के होर्न बजाने वाला भी बहुत ढीट नजर आ रहा था।
उसने भी गाड़ी का हॉर्न दोबारा बजाना शुरू किया।
कंदील ने अपने सर को ऊपर उठाकर सामने खड़ी हुई गाड़ी की तरफ देखा।
उस गाड़ी के अंदर डॉक्टर बख्श बैठे हुए थे।
और होर्न बार-बार बजा रहे थे।
कंदील ने जब देखा के डॉक्टर बख्श उसे गाड़ी के अंदर बैठे हुए हैं।
तो उसने ऊन पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया ।
और मुंह दूसरी तरफ फेर लिया।
अब गाड़ी का हॉर्न बंद हो चुका था।
यह इस वक्त यहां क्या कर रहे हैं ,इन्हें तो बस में होना चाहिए था?
कंदील सोचने लगी।
लगता है डॉक्टर कंदील जफर, आज आपके कानों को कुछ सुनाई नहीं पड़ रहा है।
ये डॉक्टर बख्श की आवाज थी।
बात यहां तक तो ठीक है ।
के कुछ सुनाई नहीं पड़ रहा है।
अब क्या आपको दिखाई देना भी बंद हो गया है?
डॉ बख्श गाड़ी से उतर के अब कंदील के पास आ चुके थे।
वह थोड़ा सा गुस्से में थे।
कंदील ने उनकी तरफ सवालिया नजरों से देखा।
क्या आपको मेरी गाड़ी का हॉर्न सुनाई नहीं पड़ रहा है?
मैं यहां आपसे ही मुखातिब हूं डॉक्टर कंदील।
जब काफी देर बाद भी कंदील ने कोई जवाब नहीं दिया तो डॉक्टर बख्श ने कहा।
सॉरी सर मेरा ध्यान कहीं और था।
कंदील ने माजरत चाही ।
कंदील को अपनी गलती का एहसास हुआ।
चलिए मेरे साथ गाड़ी में बैठीए है।
डॉ बख्श ने हुकुम सुनते हुए कंदील से कहा।
पर मैं आपके साथ गाड़ी में क्यों बैठू डॉक्टर बख्श?
कंदील ने पूछा।
इसलिए डॉक्टर कंदील की आपको भी इस कैंप में जाना है जिस कैंप में मुझे जाना है।
और आप की बस छूट चूकी है।
डॉक्टर बख्श ने कहा।



Comments
Post a Comment