Kandeel, part, 30
अल्लाह का शुक्र अदा कीजिए यहां कैमरे तो लगे हुए हैं। लेकिन इसकी आवाज डॉक्टर बख्श के पास नहीं जा सकती है।
अगर डॉक्टर बख्श के पास इसकी आवाज चली जाती।
तो यकीनन वो आपको गोली से उड़ा देते हैं।
डॉ समीर कंदील से मजाक करते हुए बोले।
समीर और कंदील दोनों साथ में चलने लगे थे।
जवाब मे कंदील ने डॉक्टर बख्श के हुए सारे वाक्या को।
डॉ समीर को बता दिया।
तो यह मैटर था।
डॉ समीर ने कहा।
बट कन्दील माइंड मत कीजिएगा।
लेकिन इस मैटर में सारी गलती आपकी ही है?
जरा सोचिए।
इमरजेंसी वार्ड में सारी मशीन और दवाइए बगैरह ऐसी मौजूद होती है जो हम पेशेंट को ध्यान में रखकर वहां का ऐहतमाम करते हैं।
इसलिए की इमरजेंसी पेशेंट को कोई दिक्कत ना हो।
और हमें कहीं जाने की जरूरत ना पड़े।
इसलिए सारा ऐहतमाम इस लिहाज से किया जाता है के पेशेंट को कोई दिक्कत महसूस ना हो।
इमरजेंसी बर्ड और एक नॉर्मल वार्ड में काफी फर्क होता है।
तो अगर आप नॉर्मल वार्ड के पेशेंट को इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट करेंगे।
और इमरजेंसी पेशेंट उस वक्त आ जाएगा तो बहुत दिक्कत होगी कंदील।
डॉक्टर समीर ने कन्दील को आईना दिखाते हुए कहा।
मैं मानती हूं डॉक्टर समीर के मेरी गलती थी ।
लेकिन यह कहां का इंसाफ होता है कि आप सारे वार्ड के लोगों और डॉक्टर्स के सामने आप मुझे सुना दे।
और मेरे इंसल्ट कर दें।
अगर मैंने गलती की थी, तो आप मुझे अपने केबिन में बुलाकर बता सकते थे।
समझा सकते थे, लेकिन डॉक्टर बख्श ने ऐसा कुछ नहीं किया सब लोग के सामने मेरी इज्जत इंसल्ट की।
समीर ने कंदील की तरफ देखा, उसको देखकर लग रहा था कि।
कंदील की आंखें भीगी है।
आप तो अच्छी तरह से जानती हो ,डॉक्टर बख्श के रूल्स को।
अगर गलती इंसान सबके सामने करता है तो वह उसकी इंसल्ट सबके सामने ही करते हैं।
उसको पनिशमेंट भी सबके सामने ही देते हैं।
डॉक्टर समीर ने कहा।
कंदील को अपनी गलती का एहसास हो रहा था।
उसको यह एहसास हो रहा था।
कि उसकी गलती की वजह से आज किसी की जान भी जा सकती थी।
वह दोनों बात करते-करते हॉस्पिटल की कैंटीन तक पहुंच चुके थे।
और डॉक्टर बख्श, कैमरे की नजर में उन दोनो को देख रहे थे।
सो मिस कंदील क्या पीना पसंद करेंगी आप।
काफी या चाय?
डॉ समीर और कंदील कैंटीन में आ चुके थे।
वह दोनों अपनी-अपनी चेयर पर आमने सामने बैठे हुए थे।
जब डॉक्टर समीर ने कन्दील से पूछा।
कॉफी, कंदील ने कहा।
डॉ समीर ने वेटर को दो कॉफी का ऑर्डर दे दिया।
समीर कंदील को देखने लगा।
उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह किस तरह से यह बात कंदील से कहे।
वह उसे कितना पसंद करता है।
लेकिन ना तो कभी कोई ऐसा मौका मिल पाया था।
और ना ही कंदील इस बात को समझती थी।
कि डॉक्टर समीर उसे कितना पसंद करते हैं।
वह दोनों ही हॉस्पिटल की कैंटीन में नॉर्मल बात कर रहे थे।
और बात करते हुए कभी-कभी हस देते थे ,या मुस्कुरा देते थे।
लेकिन उधर दूसरी तरफ डॉक्टर बख्श।
पूरी तरह से कंदील और समीर को देख रहे थे।
और उन दोनों का इतने नजदीक होकर बात करना।
हंसना डॉक्टर बख्श को बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा था। डॉक्टर बख्श का मन कर रहा था की वो अभी इसी वक्त समीर को वहां से उठाकर फेंक दें।
और दो थप्पड़ कंदील को मारे।
जो इस तरह हंसते हुए उससे बात कर रही थी।
डॉन'ट वरि माय डियर वाइफी।
बहुत जल्दी मैं तुम्हें दुनिया की इन गंदी नजरों से। बचाकर अपने पास रखूंगा।
तुम्हारा और मेरा शादी का एग्रीमेंट, जिसमें तुमने शर्त रखी थी कि तुम 6 साल तक मुझसे दूर रहोगी।
वह पूरा होने वाला है।
और इस बार, तुम चाहकर भी कुछ नहीं कर सकती हो ।
माय डियर वाइफी।
डॉक्टर बख्श अपने मन में सोच रहे थे।
डॉक्टर बख्श को बर्दाश्त नहीं हो रहा था कि समीर कंदील से हंस हंस। बात कर रहा था।
लेकिन इस वक्त वो मजबूर थे, वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते थे।
कंदील शायद तुम इस बात को कभी नहीं समझ सकोगी कि मैंने तुम्हें कितना चाहा था।
कितनी मोहब्बत की थी मैंने तुमसे।
मगर तुमने उस वक्त मेरे साथ धोखा किया।
जिस वक्त मुझे तुम्हारी बहुत ज्यादा जरूरत थी।
डॉक्टर बख्श।
डॉक्टर बख्श का हाथ अपनी थोड़ी से मेज पर टिका हुआ था।
कंदील तुम कभी मेरे प्यार को नहीं समझ सकती हो।
काश कंदील उस वक्त तुमने मेरा साथ दिया होता, जिस वक्त मैंने तुमसे शादी की थी।
डॉ बक्श ने अपनी आंखों को बंद किया।
उनकी आंखों में से एक कतरा आंसू का, बह कर नीचे गिरा।
बहुत मोहब्बत की थी ,डॉक्टर बख्श ने कंदील से
कंदील ने उनकी मोहब्बत को कभी समझा ही नही था।
एक सीरियस पेशेंट हॉस्पिटल में आई थी।
जिसकी डिलीवरी होने वाली थी।
और इतना कॉम्प्लिकेटेड कैसे था?
वह लेडिस सीढीओ से नीचे गिर गई थी।
जिससे उसके बच्चा और उस लेडी दोनों की जान खतरे में थी।
और इस वक्त अस्पताल में कंदील इस केस को हैंडल करने की कोशिश कर रही थी।
क्योंकि संडे होने की वजह से ,ज्यादातर डॉक्टर हाफ डे, पर जा चुके थे।
लेकिन कंदील अभी यहां पर मौजूद थी।
कंदील ने पेशेंट को चेक किया ।
और उसके हस्बैंड से यह कहा कि दोनों की जान खतरे में है।
हम दोनों में से, किसी एक की जान बचा सकते हैं ।
तो उस पेशेंट के हस्बैंड ने पिस्तौल निकाल कर कंदील के माथे पर टिका दिया।
देखो डॉक्टर तुम्हें बच्चे और मा दोनों को ही बचाना पड़ेगा और इसके लिए तुम्हें क्या करना है, यह मैं नहीं जानता लेकिन मुझे दोनों ही सलामत चाहिए?
कंदील की तो जान अटक गई थी ।
जब उसके सर पर रिवाल्वर रखा गया था।
उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और इस वक्त दूसरे डॉक्टर भी मौजूद नहीं थे?
अजीब तरीके का इंसान था वह।
सर यह क्या हरकत कर रहे हैं आप?
जो इस वक्त इस केस के सिचुएशन है वह मैंने आपको बता दी।
अब यह तय करना आपका काम है कि दोनों में से किसकी जान बचाई जाए।
हालांकि हम पूरी कोशिश करेंगे कि दोनों को ही सेव कर सके?
लेकिन सारी बात क्लियर बताना आपको बहुत जरूरी थी।
कंदील अटक अटक कर बोल रही थी।
क्योंकि अपनी मौत के खौफ से कोई भी डर सकता है? और यहां तो इस साइको शख्स ने कंदील के माथे पर पिस्तौल टिका दिया था।



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