Kandeel, part, 29

 



इधर डॉक्टर बख्श के पास कोई बहुत सीरियस पेशेंट आया था। 

उन्होंने इमरजेंसी में उसका ट्रीटमेंट तो कर दिया। 

बट  प्रॉब्लम यह हो गई थी कि इमरजेंसी बोर्ड में कोई बैड खाली नहीं था। 

डॉक्टर बख्श को बहुत ही ताज्जुब हो रहा था। 

क्योंकि  उनकी जानकारी के मुताबिक यहां पर एक बैड खाली था? 

और जब उन्होंने यहां आकर देखा तो यहां पर हर बैड पर पेशेंट मौजूद थे। 

  उन्हें इस बात की जानकारी  नहीं दी गई?

उस खाली बेड पर जो पेशेंट था।

वह इतना ज्यादा सीरियस पेशेंट नहीं था कि उसे इमरजेंसी की जरूरत पड़ती। 

उसके बावजूद उसे इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट किया गया था।

डॉक्टर बख्श ने इस वक्त सारे स्टाफ को वहां बुलाया। और पूछा कि ये किसकी हरकत थी ।

जो एक नॉर्मल पेशेंट को इमरजेंसी वार्ड में एडमिट कर दिया था।

इमरजेंसी वार्ड में जो बैड खाली था। 

उस पर नॉर्मल पेशेंट को रखने की क्या जरूरत थी?

सब ने अपने सर को नीचे झुका लिया।

जवाब दीजिए मुझे किसका था यह काम, आप इतने अनरिस्पांसिबल डॉक्टर हैं? 

क्या आप सब  को जानकारी नहीं है ,कि इमरजेंसी वार्ड में इमरजेंसी पेशेंट शिफ्ट होते हैं? 

उस पेशेंट को डेंगू हुआ था।

तो उसे इमरजेंसी की कोई जरूरत नहीं थी। 

फिर भी ऐसी हरकत ,किसकी हरकत थी ये। 

इस वक्त इस वार्ड में डॉक्टर बख्श की तेज आवाज सुनाई पड़ रही थी। 

सर वह डॉक्टर कंदील  ने ऐसा किया था। 

डॉक्टर इकरा आगे आकर बोली थी। 

कंदील जफर  ऊफफफफ।

यह नाम ही डॉक्टर बख्श को डिस्टर्ब करने के लिए काफी था। 

बुलाईए ऊन मोहतरमा को ,अभी भी वह यहां से गैरहाजिर है।

डॉक्टर बख्श के माथे पर शिकन आ गई थी।

  कुछ ही देर मे कंदील डॉक्टर बख्श के सामने मौजूद थी। 

डॉ कंदील जफर क्या आपको इतना इल्म नहीं है?

इमरजेंसी वार्ड में सिर्फ इमरजेंसी पेशेंट ही आते हैं। 

वहां उन पेशेंट को ध्यान में रखकर ही, वार्ड को तैयार किया जाता है।

  आप एक डॉक्टर होने के नाते अच्छी तरह इस बात से वाकिफ है ना। 

वो कन्दील जफर से कह रहे थे।

कंदील खामोश खड़ी उनकी डान्ट सुन रही थी।

क्योकी गलती कंदील की ही थी।

आज वह कुछ ज्यादा ही गुस्से में नजर आ रहे थे।

आपने कैसे इस नॉर्मल पेशेंट को इमरजेंसी वार्ड में जगह दे दी? 

कैसी अनरिस्पांसिबल हरकत है यह आपकी। 

सारे डॉक्टर के सामने डॉक्टर बख्श,कंदील पर चीख रहे थे। 

वह सर कोई बेड खाली नहीं था।

और उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ रही थी। 

तो मैंने सोचा इस वक्त इमरजेंसी वार्ड का बेड खाली है तो उसको वहां शिफ्ट कर देते हैं। 

और सुबह होने से पहले उसे वहां से निकाल लेंगे ।

तब तक  हॉस्पिटल का दूसरा कोई बैठ खाली हो जाएगा। कंदील ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा।

ओ मोहतरमा लगता है कि इमरजेंसी पेशेंट टाइम देख कर आते हैं। 

डॉ बक्श ने कंदील पर तन्ज करते हुए कहा। 

आप यह सॉल्यूशन अपने घर तक ही मेहदूद रखें। 

यह एक अस्पताल है आपका घर नहीं। 

जिसे आप अपने तरीके से संभाल लेन्गी ।

डॉ बक्श ने कहा।

डॉ बख्श वह मुझे लगा।


जस्ट शट अप ,कंदील जफर खामोश हो जाइए आप।

कंदील ने कुछ बोलने के लिए अपना मुंह खोला ही था।

की डॉक्टर बख्श ने उसे खामोश कर दिया।

कंदील ने  डर और शिकवा भरी नजरों से डॉक्टर बख्श की तरफ देखा। 

लेकिन वहां उसे अपने लिए एक अनजाना पन हीं नजर आया।

दफा हो जाइए यहां से और जाकर, उस अपनी हरकत को दुरुस्त कीजिए। 

डॉ बख्श ने सारे डॉक्टर को के सामने, उस वार्ड से कंदील को बाहर निकलते हुए कहा। 

सारे डॉक्टर ने अपने मुंह को नीचे झुका लिया था। 

कंदील की आंखों से आंसू बहने लगे। 

वह बिना देर किए, उस वार्ड से बाहर निकल गई।


यह क्या समझते हैं , डॉक्टर बख्श खुद को, इस तरह मेरी इंसल्ट करेंगे और मैं से कुछ भी नहीं कहूंगी?

एक सीनियर डॉक्टर होने के नाते अपनी पावर का मिस यूज करते हैं डॉक्टर बख्श। 

कंदील लगभग भागते हुए चल रही थी।

और अपनी आंखों से आंसुओं को साफ कर रही थी। कितना भी मुझे डराने की धमकाने की कोशिश करेंगे लेकिन मैं इनसे नहीं डरूंगी।

मैं उनकी हर बात का मुंह तोड़ जवाब दूंगी।

और उनकी सारी बातों को फेस करूंगी। 

कंदील  बड़बड़ाते हुई चल रही थी। 

मैने इतनी बड़ी गलती तो नहीं थी, मेरी जो सारे डॉक्टर के सामने  इंसल्ट कर दी।

इतना कुछ मुझे फूजुल में सुना दिया।

समझते क्या है यह डॉक्टर बख्श खुद को?

तमीज तो इनके अंदर छूकर नहीं गुजरी है।


कंदील ने नोट नहीं किया था, कोई उसके पीछे-पीछे चल रहा था।

कंदील की हर हरकत को नोट कर रहा था। 

वो डॉक्टर बख्श को जाने कितना बुरा भला बोल चुकी थी।

वह अपनी धुन में चली जा रही थी।

इस वक्त गुस्सा कंदील को भी बहुत आ रहा था।

वो इतने गुस्से में थी, के उसे चलते हुई है एहसास नहीं हुआ?

के सामने थम है ।

जिससे कंदील टकरा जाती।

अगर दो ताकतवर हाथ उसे पकड़ के

रोक नहीं लेते।

आप कंदील की ऑखे हैरत से और बड़ी हो गई थी।

वो अचानक से इस शख्स को यहा देखकर हैरान हो गई।


अरे कंदील संभाल के।

डॉ समीर ने कन्दील का हाथ पकड़ कर अपनी जानिब खींचा। 

क्योंकि अगर वह यह नहीं करते तो कंदील को  चोट लग जाती?

  डॉक्टर  समीर का कंदील का हाथ खींचने से कंदील डायरेक्ट डॉक्टर समीर के सीने से जा लगी।

दोनों में फैसला न की बराबर था। 

और यह मंजर कॉरिडोर में लगे कैमरे से डॉक्टर बख्श अपने केबिन में बैठकर देख रहे थे।

डॉक्टर बख्श ने जब दोनों को इतने नजदीक देखा तो गुस्से में अपने हाथों की मुट्ठियों को भीच लिया। 

क्या बेहूदगी  है यह?

  उन्होंने अपना हाथ में पर मारते हुए कहा।

कंदील को जब इस बात का एहसास हुआ था ।

कि डॉक्टर समीर उसके बहुत नजदीक हैं।

तो कन्दील ने जल्दी से खुद को डॉक्टर समीर से अलग किया।

कहां ध्यान था आपका कंदील।

अगर अभी इस वक्त मैं यहां नहीं होता तो आप के चोट लग जाती?

  डॉ समीर ने मुस्कुराते हुए कंदील की तरफ देखकर कहा। थैंक यू मच डॉक्टर समीर, कन्दील  ने मुस्कुराने की कोशिश की।

बट माईन्ड इतना डिस्टर्ब था, कि  मैंने देखा ही नहीं के सामने थम है।

  जिससे टकरा कर मेरे चोट लग जाएगी। 

कन्दील ने भी मुस्कुराने की कोशिश की ,हालांकि उसका मूड इस टाइम बहुत ज्यादा खराब था ।

वजह थी डॉक्टर बख्श।

नो थैंक्स कंदील ईट'स माय प्लेजर। 

समीर ने कहा।  

वैसे इतने गुस्से की वजह क्या है।

अब ऐसा क्या हो गया जो आप चलते-चलते आप डॉक्टर बख्श को काफी कुछ सुना रही थी?



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