Kandeel, part, 28

 


सब लोग कंदील कसूरवार समझ रहे थे।
बेटा अगर ऐसा ही करना था तो  इतना  ड्रामा करने की क्या जरूरत थी तुम्हें?
तुमने उस वक्त सैफ के रिश्ते के लिए मना क्यों किया?
जब तुम्हें यह पसंद था तो उस वक्त हमसे बोल देती।
हम सबके सामने तुम्हारी शादी करवा देते।
ताई अम्मा ने कहा।
हां कन्दील,  तुमने सैफ के पेरेंट्स के सामने भी हमें नीचा दिखाया।
जबकि उन लोगों से बहुत अच्छे तालुकात थे हमारे।
यह ताया अब्बू थे।
बट ताया अब्बू ये सब कुछ गलत है ,धोखे से किया है यह सब इसने।
इस वक्त कंदील को सैफ से इतनी नफरत महसूस हो रही थी।
क्योंकि सैफ की हरकत की वजह से ही उसकी फैमिली वाले उससे नफरत कर रहे थे?
कंदील ने लाएबा की तरफ नजर दौड़ाई, कि शायद लाएबा उसके फेवर में कुछ बोलेगी।
लेकिन लाएबा ने भी कंदील को देखकर अपनी नजरों को झुका लिया।
इस बात से साफ जाहिर था के लाएबा भी उसे गलत समझ रही है।

मिस कंदील प्लीज।
हमारा टाइम और बर्बाद मत कीजिए।
और आप सैफ हारून के साथ चलिए।
ऑफिसर ने अपनी गर्दन को पकड़ते हुए कहा।
कंदील अपने पैरों में मनो मनो बोज लेकर, सैफ की तरफ बड़ी थी।
उसे लग रहा था, इसके अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है। क्योंकि उसकी फैमिली वाले उसकी एक बात मानने को भी तैयार नहीं थे?
वह आहिस्ता आहिस्ता चलते हुए सैफ के नजदीक आ गई। उसने सैफ के चेहरे पर देखा।
जहां जीत साफ नजर आ रही थी।
वही सैफ के चेहरे पर, एक मुस्कुराहट थी।
कन्दील को ऐसा लग रहा था ,जैसे वह कहना चाह रहा हो। की देखो यहां मेरी जीत हो गई है।
तुम हार गई हो, तुम्हारी फैमिली तुम्हें गलत   ठहरा रही है।
सैफ बहुत खुश हो गया था ,कि कंदील उसके साथ, चलने को तैयार हो गई हैं।
अभी वह मुस्कुराते हुए कंदील की तरफ ही देख रहा था।
एक जन्नाटेदार थप्पड़ उसके चेहरे पर आकर पड़ा। चटाखखख कंदील के इस थप्पड की आवाज से सब हैरान होकर कंदील और सैफ को देखने लगे थे
कंदील के मारे हुए थप्पड से सैफ का मुह दूसरी तरफ लुढ़क गया था।
उसने बेहद गुस्से से कंदील की तरफ देखा।

क्या समझते हैं आप खुद को?
के आप जो भी करेंगे? वह आसानी से हो जाएगा।
सैफ मैं आपके साथ हरगिज नहीं जा सकती थी।
मैंने एग्रीमेंट पर आपकी बात मानकर साइन कर दिया था। लेकिन उस एग्रीमेंट में यह भी लिखा हुआ था।
अगर आपका जैहन कमजोर है तो मैं आपका जैहन दुरुस्त करती हू।
मै मशवरा देती हूं अपने जैहन पर जोर डालिए।
कांटेक्ट लिस्ट  मे कए शर्त भी शामिल थी।
कि मैं आपके साथ नहीं जाऊंगी।
शादी तो मैंने आपके साथ कर ली है।
लेकिन अभी रहूंगी नहीं आपके साथ।
कंदील ने कहा।
सैफ को ध्यान आ गया।
की जो कंदील बोल रही है वह सही है यही एग्रीमेंट में था। और यही कंदील की कांटेक्ट मैरिज की शर्त भी थी।
और यह बात की कंदील को सैफ के साथ कुछ दिन रहना पड़ेगा।
ये सिर्फ उसने मुंह से बोला था।
यहां एग्रीमेंट में कुछ भी ऐसा नहीं लिखा हुआ था।
लेकिन इस वक्त कंदील का थप्पड़ मारना।
सैफ के दिल और दिमाग को हिलाने के लिए काफी था।
वह कभी ख्वाब में भी नहीं सोच सकता था।
कि वह कंदील जिसे उसने हद से ज्यादा चाहा है।
उसे थप्पड़ मारेगी।
ऑफिसर ये  लिजिए कांटेक्ट मैरिज के पेपर्स।
और इसमें आप खुद ही पढ़ लीजिए।
   इस कांटेक्ट मैरिज के एग्रीमेंट  में क्या-क्या लिखा है? कंदील ने वो एग्रीमेंट, ऑफिसर की तरफ बढ़ते हुए कहा। ऑफिसर ने बहुत ही ध्यान से उस पूरे एग्रीमेंट को पड़ा। एग्रीमेंट पढ़ते हुए ऑफिसर के माथे पर बाल आ रहे थे।
यू आर अब्सोल्युटली राइट कंदील जफर।
आप ठीक कह रही है, इस एग्रीमेंट में यह बात शामिल है। आप सैफ के साथ अभी नहीं रहेंगी।
लिहाजा हम आपको अपने साथ नहीं ले जा सकते।
बट इस एग्रीमेंट में यह भी लिखा हुआ है।
कि जब 6 साल पूरे हो जाएंगे और आप डॉक्टर बन जाएंगी।
तो आपको अपने शौहर के साथ ही रहना पड़ेगा।
उस ऑफिसर ने कहकर वह पेपर्स, सैफ को थमा दिए।
  सैफ हारून आपको यहां से अकेले ही जाना पड़ेगा। आप एग्रीमेंट के हिसाब से कंदील को अपने साथ नहीं लेकर जा सकते।
ऑफिसर ने कहा।
सैफ का दिमाग एकदम से घूमने लगा।
उसे याद आ गया।
कि यह बात एग्रीमेंट में शामिल नहीं थी।
कंदील को कुछ दिन उसके साथ रहना पड़ेगा।
सैफ बहुत ही गुस्से से चलता हुआ, हवेली की बाहर की तरफ जाने लगा।
एक बात जैहन में हमेशा शामिल कर लेना कंदील जफर। इस वक्त त में यहां से जा रहा हूं।
लेकिन वह दिन जल्दी आएगा। जब तुम मिन्नत करोगी। कि मैं तुम्हें अपने साथ ले इस हवेली से ले जाऊ याद रखना तुम इस बात को कंदील।
  और उस वक्त जो तुमने मेरे साथ अब किया है।
मैं वही करूंगा।
वह जाते-जाते। मुड़कर कंदील को वार्निंग देता
हुआ  चला गया।

सुना तुमने कन्दील  जफर अब मै वापस नहीं आऊंगा कभी नहीं आऊंगा मैं वापस।
तुम तरसोगे मेरा मुंह देखने के लिए , लेकिन मैं वापस कभी तुम्हारे सामने नहीं आऊंगा।
सैफ के लफ्ज कंदील के कानों में गुन्ज रहे थे।
कंदील ने अपने कानों को बंद किया। 
उसे लग रहा था, कि कहीं सैफ के अल्फाजों से उसके कान फट न जाए।
कंदील ने कब से  अपनी बंद हुई आंखों को खोल दिया? पुरानी यादों से कंदील वापस आ चुकी थी।
उसने अपनी आंखों को खोलकर केबिन पर नजर दौड़ाई। वहां उसकी सिवा कोई नहीं था।
तुमने तो वादा किया था ,ना मुझसे कि तुम कभी वापस नहीं आओगे।
फिर तुम क्यों वापस आ गए?
कंदील अपने मुंह में बोल रही थी।
क्यों वापस आ गए तुम?
कंदील को महसूस हो रहा था कि 6 साल का लंबा सफर तय करने के बाद भी, कंदील ने जहां से अपना सफर शुरू किया था आज भी वह वहीं पर खड़ी है।
डॉ बक्श और सैफ दोनों अलग-अलग तरह के एक ही इंसान थे।
और अब इन दोनों शख्सियतों का सामना कंदील को करना था।
कंदील जफर तुम्हें डरने की और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
कुछ नहीं कर पाएंगे यह मेरा।
इस बार में बहुत बहादुर बन चुकी हूं ।
पहले की तरह उनके आगे अपने घुटनों को नहीं टेकून्गी। कंदील  ने अपने दिल को समझाते हुए।
अपने आंसू साफ किये।
और बहुत ही कॉन्फिडेंट के साथ अपना बैग ऊठा कर अपने कन्धे पर डाला और केबिन से बाहर
निकल गई।
मैं तुम्हारा हर वार सहने के लिए तैयार हूं।
सैफ हारून कंदील ने अपने दिल में सोचा।


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