Kandeel, part, 23

 




तुम्हें हासिल करने के लिए मैने क्या-क्या नहीं किया? 

लेकिन तुमने मेरे साथ बेवफाई की।

डॉ बख्श अपनी पुरानी यादों से वापस आ चुके थे। 

उन्होने  अपने सर को  दोनों हाथों से जकड़ रखा था।

इस वक्त  उनका सर बहुत तेज दुखने लगा था।

क्यों किया तुमने ऐसा? 

क्यों तुमने मेरे साथ ऐसा करके फिर वादा खिलाफी की? 

क्यों साथ निभाने की बात की? 

और बीच रास्ते में छोड़कर चली गई। 

जवाब देना होगा तुम्हें इन सब बातों का।

मुझे हर लमहे का अपने ऊपर की गई एक-एक बात का। तुमसे हिसाब लेना है। 

डॉक्टर बख्श की आंखें लाल हो रही थी।

उन्होंने अपनी पॉकेट से मोबाइल निकला।

मोबाइल निकलते ही जैसे फोन ऑन किया। 

उसमें वह प्यारी सी तस्वीर दिखाई पड़ने लगी।

जिसकी हंसी से ही डॉक्टर बख्श की। सारी थकान दूर हो जाती थी।

बस डियर कुछ दिनों की और बात है।

फिर तुम मेरे साथ होगी।

यहां मेरे नजदीक, मेरे केबिन में बैठी होगी।

डॉ बक्श मोबाइल में देखकर उस तस्वीर से बातें करने लगे।

अब लगभग हमारी जुदाई का सबब खत्म हो चुका है।

कोई भी तुम्हें मुझसे अलग नहीं कर सकता ।

एक बार ऐसा हो चुका है।

एक बार मैं धोखा खा चुका हूं। 

लेकिन अब ऐसा बिल्कुल नहीं होगा।

डॉ बख्श बोले।

डॉक्टर बख्श जाने कौन-कौन से मानसूबे  अपने दिल में तैयार करने लगे थे?


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नहीं नहीं ऐसा हरगिज नहीं हो सकता।

मैं डिप्रेशन में आ गई हूं ।

इसलिए मुझे ऐसा लग रहा है।

वह, वह शख्स कभी भी सैफ नहीं हो सकता।

कंदील अपना केबिन बंद करके बुरी तरह हांफते हुए इस बात को सोच रही थी।

कंदील बहुत बुरी तरह डर चुकी थी, यह बात सोच कर।

मगर ,मगर वह आंखें वह, आंखों में कैसे भूल सकती हूं? 

और वह इतना नजदीक होकर वह उनका बात करना।

मैं कुछ भी नहीं भूल सकती हूं। 

डॉक्टर बक्श,की इस बात से ,कंदील इस वक्त बहुत कशमकश में फंसी हुई थी।

उसकी समझ में नहीं आ रहा था।

कि ऐसा कैसे मुमकिन हो सकता है?

या तो आज उसने सैफ के बारे में इतना सोचा था।

की डिप्रेशन में आकर उसे डॉक्टर बख्श भी सैफ नजर आ रहे थे।

मगर इतनी सारी चीज इत्तेफाक से तो नहीं हो सकती थी। सब कुछ वही था, वही आंखें, वही कठ काठी। 

सिर्फ   उनका बड़ा हुआ हल्का शेव।

वह उन्हें सैफ से जुदा कर रहा था।

उनकी सारी आदते , उनकी सब हरकतें। 

उस सैफ की तरह ही थी।

बस सैफ ने आज तक कंदील से रूड बिहेव नही किया था।उसकी ऑखो मे हर वक्त कंदील के लिए मोहब्बत थी।

इस बात को कंदील चह कर भी नही भूल सकती थी।

किसी ऑखो मे अपने लिए बेईन्तेहा मोहब्बत कोई भी शख्स भूल नही सकता है।

चाहे वो उसे ईगनोर ही क्यो ना करता हो


सिर्फ डॉक्टर बख्श का शेव ऐसा था। जिससे वो सैफ में नहीं मिल रहे थे। 

क्योंकि सैफ क्लीन सेव रहता था?

अब कंदील के लिए एक मुश्किल और बढ़ रही थी। 

वह क्या करती और किसको बताती ये बात उसकी समझ में नहीं आ रहा था? 

एक दिल कह रहा था कि, यह सैफ और डॉक्टर बख्श एक ही है।

जबकि वह इस बात को झुटला रही थी।

कि वह दोनों एक नहीं हो सकते।

उसे गलतफहमी हुई है इस बात की।

कंदील खुद को समझा रही थी ।

और खुद को नार्मल करने की कोशिश कर रही थी। 

अगर ऐसा हो जाता कि वह दोनों शख्स एक होते।

इससे बड़ी मुश्किल कंदील के लिए हो 

नहीं सकती थी।

कंदील को आहिस्ता आहिस्ता करके डॉक्टर बख्श की पहली मुलाकात से लेकर अब तक की सारी बातें याद आ रही थी। 

इस तरह पहली बार और पहले ही मुलाकात में कंदील को पनिशमेंट देना।

और कंदील से इतना रूड बिहेव करना।

उनको देखकर ऐसा लगता था।

कि वह कंदील से किसी बात का बदला लेना चाह रहे हैं। लेकिन कंदील इन सब बातों को इग्नोर करती रही थी। क्योंकि वह यह जानती थी कि डॉक्टर बख्श अपने पनिशमेंट के लिए मशहूर है? 

लेकिन अब जाने क्यों कंदील को ऐसा महसूस हो रहा था। के डॉक्टर बख्श जानकर कंदील के साथ 

ऐसा कर रहे थे।

  कंदील ने हैरान होकर अपने खुले हुए मुंह पर हाथ रख।

ऊफफफफ अल्लाह ये सब क्या है


एक-एक करके सारी बातें कंदील के सामने आ रही थी और उसे हैरान कर रही थी। 

कंदील बेचैनी से अपने केबिन में इधर-उधर टहल रही थी। 

सारी बातें एक फिल्म के सीन की तरह उसकी आंखों के सामने लहरा रही थी।

फिर कंदील कुर्सी पर बैठकर  अपने सर को कुर्सी पर टिकाकर, आंखों मून्द कर खुद को रिलैक्स करने की

कोशिश करने लगी। 

एकदम से उसकी आंखों के सामने, वह लम्हा लहरा गया। जब कुछ साल पहले उसकी मोबाइल पर फोन आया था।



हवेली के एक मुलाजिम ने फोन किया था। 

कंदील बीबी। 

नवाब साहाब बेगम साहिबा और लाएबा का एक्सीडेंट हो गया है।

कंदील ने जब यह खबर सुनी तो अपने कॉलेज से उल्टी सीधी भागती हुई। अपनी कार तक पहुंची।

उसने देखा आगे वाली सीट पर उसका ड्राइवर बैठा हुआ था।

ड्राइवर जल्दी से गाड़ी सनलाइट हॉस्पिटल की तरफ लो।

कंदील ने गाड़ी में बैठकर गाड़ी का दरवाजा बंद किया।

और ड्राइवर को हुकुम सुनते हुए कहा। 

ड्राइवर ने जैसी कंदील का हुक्म सुना।

बिना देरी किए उसने गाड़ी स्टार्ट कर दी। 

इस वक्त कंदील के दिल पर बहुत बुरा वक्त गुजर रहा था। आगा जाना ,बेगम साहिबा,  से वह बेइंतहा प्यार करती थी। 

और लाएबा भी उसके लिए एक दोस्त, एक बहन से कम नहीं थी।

या अल्लाह तू सब ठीक रखना।

इन सब को कुछ ना हुआ मैं ज्यादा चोट ना लगी हो। 

वह हल्के हल्के 

बागबड़ा रही थी। 

वहीं आगे की सीट पर बैठा हुआ ड्राइवर। 

गाड़ी के मिरर से कंदील को देख रहा था। 

ड्राइवर ने देखा कि कंदील का जैहन किसी भी तरह ड्राइवर की तरफ नहीं था। 

वह बहुत परेशान नजर आ रही थी।


कंदील की नजर गाड़ी से बाहर गई तो उसे यह रास्ता कुछ। अंजना सा नजर आया।

ड्राइवर या कौन से रास्ते से लेकर जा रहे हैं मुझे?

कंदील के बोलने पर ड्राइवर ने उसे कोई जवाब नहीं दिया बस गाड़ी को दौड़ता ही रहा। 

आप सुन नहीं रहे हैं क्या ,यह कौन से रास्ते से मुझे लेकर जा रहे है? 

कन्दील ने थोड़ी तेज आवाज में बोली। 

लेकिन इधर गाड़ी की रफ्तार और ज्यादा तेज हो चुकी थी।

यह आप क्या कर रहे हैं ,गाड़ी किस साइड में लेकर जा रहे हो ।

कंदील ने कहा।

लेकिन वहां से कोई जवाब ही नहीं आया वह ड्राइवर गाड़ी चलाने में इतना ज्यादा मसरूफ लग रहा था।

कंदील को उसकी बात का जवाब भी नही दे रहा था।



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