Kandeel, part, 21




 राइट सर आप ठीक कह रहे हैं ।

कि गैर हाजिर होने के लिए पहले वजह बताने जरूरी है

बट।

अगर कभी आपकी इमरजेंसी में तबीयत खराब हो जाए। तो कैसे ईत्तिला दी जाए? 

कंदील ने जवाब दिया।

फिर भी आपको मेरे असिस्टेंट को कॉल करके बता देना चाहिए था।

कि आपकी तबीयत खराब है। 

उन्होंने कहा।

एनीवे  आपको जो केस स्टडी करने के लिए मैंने दिए थे।

  उम्मीद करता हूं कि वह अपने स्टडी कर लिए होंगे?

डॉ बक्श ने फाइल बंद करके कंदील की तरफ देखते हुए कहा।

वो ,वो सर मै।

कंदील की समझ में नहीं आ रहा था कि वह उनकी बात का क्या जवाब दे?

कंदील जफर, यस एनड नो।

डॉ बक्श ने कहा।

जी सर मैंने वह कैसेज अभी स्टडी नहीं किए हैं? 

कंदील समझ रही थी ।

के डॉक्टर बख्श की नई पनिशमेंट तैयार है

उसके लिए?

आप जानती हैं, कंदील जफर के मैं आपके साथ क्या कर सकता हूं? 

डॉक्टर बख्श अपने चेहरे पर सख्ती लाते हुए बोले। 

कन्दील  ने खामोश होकर अपना सर को झुका लिया।

कंदील के इस तरह से सर झुकाने पर डॉक्टर बख्श के चेहरे पर हल्की सी स्माइल आ गई।

बस यही तो मैं चाहता हूं।

तुम्हारा एटीट्यूड मेरे सामने बिल्कुल ना चले।

तुम्हारा एटीट्यूड को ,ही मुझे मिट्टी में मिलना है।

मैं हर वह लम्हा लेकर आ जाऊंगा ।

जिस लम्हे में तुम मेरी बातों को खामोशी से आंखों मून्द कर मान जाओ।

डॉ बख्श अपने दिल में सोच रहे थे।

सॉरी सर आगे से  आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा।

मैं अपने सारे काम वक्त पर कर लूंगी।

कंदील बिना नजरे उठाएं ही डॉक्टर बख्श से बोली।

मुझे भी आपसे यही उम्मीद है। 

डॉक्टर बख्शी ने कहा।


डॉक्टर बख्श बड़ी खामोशी से कंदील  का जायजा ले रहे थे।

सुर्ख सफेद रंग रंगत दरमियां कद और लंबे काले बाल। जो कंदील की खूबसूरती को और निखारते थे।

उस पर उसकी होंठ के पास का तिल, 

ऊफफफफ

वह तो जान लेने के लिए ही काफी था।

इस वक्त जिस अंदाज से नजरे झुका कर कंदील बैठी थी। बहुत ही भोली नजर आ रही थी।

इस लड़की का चेहरा कितना धोखेबाज है, ना कितनी भोली नजर आती है, ये

लेकिन हकीकत तो कुछ और ही है।

कौन कह सकता है कि धोखेबाज है? 

इसने किसी को धोखा दिया है। 

डॉक्टर बख्श के यह लफ्ज़ कंदील सुन नहीं सकती थी क्योंकि वह दिल ही दिल में बोल रहे थे?

डॉ कंदील यह कुछ केसेस और है इन पर भी आपको स्टडी करनी है।

और स्टडी करने के बाद मुझे रिपोर्ट करनी है।

डॉक्टर बख्श, अभी जिस  फाइल में स्टडी कर रहे थे।

वह फाइल उन्होंने कंदील की तरफ बढ़ते हुए कहा।

पहले क्या कम केसेस की फाइल मुझे दी थी।

जो अब और फाइल्स दे रहे है।

हिटलर कहीं के, कंदील हल्के हल्के बड़ बढ़ा रही थी।

सॉरी।

कंदील जफर क्या आपने कुछ कहा अभी?

डॉक्टर बख्श  कंदील के बढ़ बढ़ाने की आवाज सुन चुके थे।

इसलिए उन्होंने अपने माथे पर बाल डालते हुए कहा।

वो सर मै बस में यह कह रही थी।

मैं जल्दी ही इन केसेस की स्टडी करके आपको रिपोर्ट करूंगी। 

कन्दील ने बात को संभालते हुए कहा।

नहीं तो अगर वह एक भी लफ्ज सुन लेते।

तो जाने कौन सी पनिशमेंट मिलती कंदील को?

डॉ बख्श बहुत गौर से कंदील को देख रहे थे।

ओके डॉक्टर कंदील ,अब आप यहां से जा सकती हैं ।

डॉ बख्श ने थोड़े रूड लहजे में कंदील से कहा था। 

और कंदील ने दिल ही दिल में खुदा का शुक्र अदा किया था।

कंदील वहां से उठकर जाने लगी।

अभी वह दरवाजे तक पहुंची थी।

के डॉक्टर बख्श ने पीछे से आवाज लगाई?

1 मिनट डॉक्टर कंदील जफर।

रुकिए जरा। 

डॉ बख्श बोले। 

कंदील के पैर जाते-जाते वहीं रुक गए।

अब क्या याद आ गया हलाकू खान को कंदील ने दिल में सोचा ?

डॉ बख्श अपनी जगह से उठाते हुए आहिस्ता आहिस्ता चलकर कंदील के नजदीक आने लगे। 

कंदील अभी तक इस पोजीशन में खड़ी हुई थी।

उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा था।

डॉक्टर कंदील जफर।

डॉक्टर बख्श ने बिल्कुल कंदील के नजदीक आकर उसके कान में आहिस्ता से कहा।

उनकी गरम-गरम सांसे डॉक्टर कंदील को बेचैन कर रही थी।

वो जाने क्यों इस तरह से किया करते थे?

जी जी सर। कंदील हडबढ़ाते हुए डॉक्टर बख्श की तरफ मुड़ी थी।

वह जैसे ही डॉक्टर बख्श की तरफ मुड़ी। 

कंदील डॉक्टर बखश से टकरा गई। 

जो उसके पास फाइल थी वह नीचे गिर गई।

ओहहह ,सॉरी सर कंदील ने कहा।

और नीचे झुककर फाईल उठाने लगी।

डॉक्टर बख्श भी उसकी हेल्प करने लगे।

सारी फाइल्स के पेज जमीन पर बिखर चुके थे।

वह दोनों ही फाइल के पेजो को जमा करने लगे।


कंदील आपको पता है।

मुझे धोखेबाज लोग बिल्कुल पसंद नहीं है।

डॉक्टर बख्श सारे पेज जमीन पर से उठाकर ,कंदील को देते हुए बोले।

कन्दील  हैरान होकर उनकी आंखों में देखने लगी।

न जाने क्या था उनकी आंखों में? 

अजीब सी बेचैनी, एक मजबूरी।

डॉक्टर बख्श आप। 

कंदील कुछ कहती उससे पहले ही ,लफ्ज उसके हलक में अटकने लगे थे।

यह चेहरा और यह आंखें। 

बहुत जानी पहचानी लग रही थी कंदील को।

कंदील इस तरह हैरान आंखें फाड़ कर उन्हें देख रही थी। डॉक्टर बख्श पर इस बात का कोई असर नहीं हुआ था।

वह बहुत मुतमईन और पुरसुकून क नजर आ रहे थे।

या अल्लाह ऐसा कैसे हो सकता है।

कंदील की बेचैनी एकदम से बढ़ने लगी थी। 

उसकी समझ में नहीं आ रहा था।

कि यह कैसे हो सकता है?

ये बात आप कभी भूलना ,नही कन्दील जफर मै नफरत करता हूं,ऊन लोगो से जो वादा करके फिर मुकर जाते है।

एकदम से डॉक्टर बख्श के चेहरे पर सख्ती आ चुकी थी।

और कंदील  इस पोजीशन में थी है वह क्या बोले?

ऐसा लग रहा था किसी ने उसे स्टेचू बना दिया हो।

इस वक्त कंदील को उसका जिस्म बेजान महसूस हो रहा था।

वह कभी ख्वाब में भी नहीं सोच सकती थी कि ऐसा हो सकता है।

कंदील सफर जाइए इस रूम से बाहर और अपना काम कीजिए। 

डॉक्टर बख्श  ने लगभग डांटते  हुए लहजे मे कंदील से कहा था। 

और कंदील,  उनके इस तरह डाटने पर, लगभग भागते हुए रूम से बाहर निकल गई।

कंदील लगभग भगाने के अंदाज में, तेज चलती हुई अपने केबिन की तरफ आई।

और अपने केबिन में आकर उसने दरवाजा बंद किया। दरवाजे से टेक लगाकर, बुरी तरह हाफने लगी। 

जैसे उसने कोई भयानक ख्वाब देखा हो। और उसे जाग गई हो।

ओहहहहहह ये शख्स। 

कैसे कैसे मैने इसको पहली नजर मे नही पहचाना ।

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