Kandeel ,part 15


 कंदील, कंदील इस आवाज से। कंदील की सोचो का दौर टूट चुका था।

कंदील ने महसूस किया कि कोई आहिस्ता आहिस्ता उसके बालों को सहला रहा था।

कंदील ने अपना सर को उठाकर और पीछे मुड़कर देखा। आगा जान आप।

वह अपने रूम में आगा जान को देखकर शॉक्ड हो गई थी। 

क्योंकि ऐसा कभी नहीं होता था?

आगा जान को  कंदील से मिलना होता।

तो किसी मुलाजिम  से कहलवा देते थे। 

कंदील उनके रूम में हाजिर हो जाती थी। 

लेकिन ऐसा पहली बार हुआ था। 

वह इस वक्त यहां उसके कमरे में मौजूद थे। 

कंदील हड़बड़ा का उठ गई। 

और उसने अपनी पोजीशन को ठीक किया।

क्योंकि वह बेसुध उल्टी लेटी हुई अपने सोचो में गुम थी?

आगा जान आप ,कंदील उम्मीद के खिलाफ अपने सामने नवाब साहब को देखकर चौंक गई थी ।

कंदील सीधे होकर बैठ गई और अपने दुपट्टे को सर पर दुरुस्त किया।

अरे आगा जान अगर कोई बात थी तो आप मुझे नीचे बुला लेते हैं ।

आपने क्यों तकलीफ की ऊपर आने की?

वह अपने जज्बातों को छुपा कर मुस्कुराते हुए बोली। 

जबकि उसके चेहरे से देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था।

कंदील काफी वक्त से परेशानी में मुब्तिला है?

जहमत की कोई बात नहीं है बेटा

मैं दोपहर से तुम्हारा चेहरा नहीं देखा था ।तो मन में आया क्यों ना तुम्हारे कमरे में जाया जाएं काफी अरसा हो गया छत के इस एरिया में आए हुए?

नवाब साहाब ने मुस्कुराकर कंदील के सर पर हाथ फेरा था। और उनके हाथ फेरते ही कंदील सिसक सिसक कर रोने लगी।

और  नवाब साहब के कंधे से टिग गई।

नवाब साहब ने कुछ नहीं कहा खामोश  रहे ।

और उसके सर पर आहिस्ता आहिस्ता थपकिया देते रहे।

कुछ देर बाद जब कंदील को रोने से अपना दर्द हल्का महसूस हुआ तो उसने खुद के आंसू साफ किये। 

इस दौरान नवाब साहब ने एक लफ्ज कंदील से नहीं कहा था।

वो चाह रहे थे कि वह कुछ देर रोकर अपने दिल को हल्का कर ले।

बेटा मेरी जिंदगी में मैने बहुत बड़े-बड़े फैसले की है। और अल्लाह का शुक्र है  कभी कोई फैसला ऐसा नहीं किया जिससे मुझे बाद में पछताना पड़े। 

  लेकिन तुम्हारे हवाले से एक बहुत बड़ा फैसला मुझसे गलत हो गया है ।

जिसका मुझे हमेशा अफसोस रहता है। कंदील उनके कंधे से टिकी हुई थी और वह कंदील से कह रहे थे।

और मैं दिल से यह चाहता हूं। 

कि तुम्हें इस फैसले। पर आगे चलने की कोई जरूरत नहीं है।

इसलिए बहुत जल्द ही मैं इस फैसले का कोई हल निकाल लूंगा। 

उनके लहजे में जो अफसोस और उदासी थी उसे 

कंदील साफ महसूस कर सकती थी। 

नहीं आएगा जान इसमें आपकी कोई गलती नहीं आपने तो मेरे लिए अच्छा ही  किया था। 

अब ये रही  मेरे नसीब की बात। जो अच्छा फैसला मेरे लिए गलत हो गया। 

अपने आज तक ना कोई गलत फैसला किया है। और ना करेंगे। 

कंदील नवाब साहाब की हिम्मत को बान्द रही थी। 

जबकि इस वक्त उसे खुद सहारे की जरूरत थी।

तुम मेरी प्यारी बेटी हो इसलिए तुम्हें मेरा फैसला गलत नजर नहीं आता ।

मुझे फक्र है तुम पर।

लेकिन मैं और मेरा दिल यह जानता है कि यह फैसला मैंने गलत कर दिया। 

और मैं चाहूंगा तुम्हें इस पर चलने पर या सर झुकाने की कोई जरूरत नहीं।

नवाब साहब ने कहा।

अपने आप को इतना परेशान करने की कोई जरूरत नहीं। बेटा हर बुरे वक्त से लड़ना सीखो।

और किसी भी चीज से डरने कि या घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

जब तक कि मैं तुम्हारे साथ हूं।

जब तक मैं जिंदा हूं तुम्हारे साथ कुछ गलत नहीं होने दूंगा। 

नवाब साहब बोले।

नवाब साहब के फोन पर रिंग बजने लगी। उन्होंने अपनी पॉकेट से फोन निकाल कर। फोन की स्क्रीन पर देखा। 

ये फोन नंबर उनके लिए कांटेक्ट लिस्ट में से नहीं था।

यह कोई नया नंबर था।

  नवाब साहाब ने 1 मिनट के लिए कुछ सोचा और फोन को रिसीव करके अपने कान से लगाया।

वालेकुम अस्सलाम आप कौन?

नवाज साहब ने उस फोन पर बात कर रहे हैं शख्स के सलाम का जवाब दिया और उससे पूछा।

तुम, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे फोन पर कॉल करने की?

एकदम से नवाब के साहब  के माथे पर शिकन आ गई। और उन्हें बहुत तेज गुस्सा आने लगा।

वह कंदील से अलग हुए और दरवाजे की तरफ। चले गए।

कंदील सोच में पड़ गई।

  किसकी कॉल थी जो नवाब साहब इतना गुस्से में हो गए।

नवाब साहब के फोन को देखकर उसे अपने फोन का ख्याल आया।

जो उसने कल रात से ही साइलेंट पर लगा दिया था।

उसने जैसे ही अपना फोन उठाया फोन को ऑन किया। उसमें काफी मिस कॉल।

फरहान की थी।

और व्हाट्सएप पर मैसेज भी था।

जिसको पढ़कर कन्दील। का हलक सूखने लगा। 

डॉ फरहान ने डॉक्टर बख्श के बारे में मैसेज किया था। के वो कन्दील के गैर हाजिर होने पर।

कितने नाराज थे।

एक तो मैं जिंदगी के कौन से पड़ाव से गुजर रही हू ऊपर से डॉक्टर बख्श भी हलाकू खान से काम नहीं है?

कन्दील ने अपने दिल में सोचा।

अब कल मेरे लिए कोई नई पनिशमेंट तैयार होगी जब मैं हॉस्पिटल जाऊंगी।

वह परेशान हो गई सोच कर। 

क्योंकि पहले से ही उसको पनिशमेंट मिल चुकी थी जो उसने आज पूरी नहीं की थी।

ऊपर से आज गैर हाजिर होने का मतलब है कल डबल पनिशमेंट करना?

या अल्लाह बस तू सब कुछ साम्भान लेना कंदील अल्लाह ताला से दुआ करने लगी।

कुछ सोचते हुए कंदील ने फरहान को कॉल किया। 

कुछ देर बाद ही कॉल वहां से रिसीव हो गई थी।

शुक्र है अल्लाह का की मैडम आपने कॉल तो  बैक की  ।

तुम्हे सुबह से इतनी कॉल कर करके मैं थक चुका था।

फरहान भी घबरा रहा था।

   जाने क्यों कंदील की कॉल रिसीव क्यों नहीं हो रही थी एसएमएस सीन हो रहे थे?

मै ये सोच कर परेशान हो रहा था।

जी डॉक्टर फरहान कुछ तबीयत ठीक नहीं लग रही थी। मुझे तो मेरी बॉडी का टेंपरेचर भी  डाउन लग रहा था ।

इसलिए आज सुबह मैं हॉस्पिटल आ नहीं पाई। 

तबीयत की खराबी की वजह से ही मेरा फोन भी साइलेंट पर था।

जो मैंने अभी हाथ में लिया तो देखा आपकी बहुत मिस कॉल थी। 


कंदील की आवाज बहुत धीमी निकल रही थी।


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