Kandeel, part ,14


 जी हा  नवाब साहाब आप फ्रीक मत कीजिए सब कुछ तैयार है ।

काफी अच्छे से  हमने सब चीजों का ऐहतमाम किया है।

एक मुलाजिम झुक कर नवाब साहब से कह रहा था।

और बाकी के तीन-चार मुलाकुम खामोश खड़े। जमीन को घूर रहे थे।

नवाब साहब मुलाजिमों को हिदायत दे रहे थे।

तभी एक मुलाजिम  ने आकर बताया कि वह लोग आ चुके हैं। 

नवाब साहब ने अपनी शेरवानी पर  दुपट्टा ठीक किया और अपनी छड़ी को उठाते हुए। बड़े ही पुरजोश और खुशी वाले अंदाज में। बाहर की तरफ चले गए।

बजाहिर तो नवाब साहाब ऊपर से तो बहुत सख्त मिजाज दिखाई पड़ते थे।

लेकिन अंदर से बहुत नरम दिल। 

और सॉफ्ट नेचर के इंसान थे। 

और मेहमानों के आने पर बहुत खुशी का मुजाहिरा करते थे।

सभी लोग एक दूसरे से बहुत खुश दिल्ली से मिले थे। जैसे पहली मुलाकात नहीं बहुत पुरानी  जान पहचान हो?

और सबकी खुश दिली का मन्जर देखकर ऐसा लग रहा था कि यह रिश्ता पक्का ही समझो। 

लेकिन कंदील एक बात से बहुत कंफ्यूज हो रही थी। 

जो लड़का लाएबा को देखने के लिए आया है।

बो  बार-बार नजरे चुराता हुआ कंदील को देख रहा था? कंदील ने कितनी बार। सोचा यह उसका वहम  है। 

उसे लड़के का रिश्ता लाएबा के लिए आया था।

लिहाजा लाएबा कंदील से काफी बड़ी थी। और उस लड़के की भी एज कंदील से  काफी ज्यादा थी।

फिर लाएबा उसकी होने वाली सास के सामने लाकर बिठाया गया?

लाएबा थी तो बहुत ही खूबसूरत।

लेकिन आज जिस अहतमाम से उसको तैयार किया गया था उससे वह और ज्यादा हसीन लग रही थी। 

लड़की की मां ने अपने नजदीकी लाएबा बिठा लिया था। और इसके सर पर हाथ फेरने लगी थी।

वह जो कुछ भी पूछती लाएबा मुस्कुरा कर उनकी बात का सिर्फ जवाब दे देती थी।

नवाब साहब आपकी पोती बहुत अच्छी और प्यारी नेचर की है। 

मुझे तो आपकी पोती बहुत पसंद आई।

लड़के की मां ने कहा था।

बस आपसे एक रिक्वेस्ट है अगर आप कुछ देर लड़की लड़के को, अकेले बात करने दे तो ज्यादा बेहतर रहेगा। उन्होंने थोड़ा हिचकिचाते ज हुए यह बात कही थी।

लड़की लड़की को अकेले बात करने की बात सुनकर नवाब  साहब के माथे पर शिकन आ गई।

आज तक हमारी हवेली में। अभी इस तरह नहीं हुआ कि लड़का और लड़की ने अकेले बैठकर साथ बात की हो। लिहाजा हम माहौल का तकाजा देखकर इजाजत देते हैं ।

इस बात की।

यह लोग अकेले में बात कर सकते हैं ।

लेकिन एक शर्त  है। 

कंदील इनके साथ मौजूद रहेगी। 

नवाब साहब ने अपना हुकुम सुनते हुए कहा। 

उस खातून ने अपने बेटे की तरफ देखा।

उनके बेटे ने मुस्कुरा कर गर्दन हा में दिला दि। 

जैसा आप ठीक समझे नवाब साहब हमें कोई एतराज नहीं।

कंदील बेटा। नवाब साहब ने कन्दील को आवाज़ लगाई।

जी आगा जान बोलिए। 

कंदील किसी फरमाबरदार बच्चों की तरह उनके सामने हाजिर होते हुए बोली। 

कंदील आप इनको पूरी हवेली घुमा दीजिए और साथ में लाएबा को भी  ले जाइए। 

नवाब साहब ने कहा।

जी आगा जान जरूर कन्दील में मुस्कुराते हुए कहा।

और लाएबा की तरफ देखकर कर एक ऑख दबाई

लाएबा का हाथ पड़कर कंदील रूम से गार्डन की तरफ आ गई 

पीछे वो शख्स भी मौजूद था।

बहुत बड़ी और खूबसूरत है आपकी हवेली। 

वह चलते-चलते। कंदील से मुखातिब हुआ था।

जी शुक्रिया यह सब आगा जान की ही पसंद का है। 

इसलिए आगा जान ने कुछ भी तब्दील नहीं होने दिया सारा कुछ ही पुराना। और बेशकीमती  है ।

आगा जान को नए जमाने का लुक पसंद नहीं है।

कंदील में मुस्कुरा कर जवाब दिया।

पुरा गार्डन घूमने के बाद वह तीनों आकर बेंच पर बैठ गए।

दोनों बेंच आमने-सामने थी ।

एक बैंच पर कंदील और लाइबा बैठे हुए थे।

और उनके जस्ट सामने, वह लड़का बैठा हुआ था।

लाएबा ने महसूस क्या वह लड़का भी ज्यादा बोलने वाला नहीं था ।

उसे भी शर्म महसूस हो रही थी बाते करने मे?

लाएबा, मैं बेवजह यहां कबाब में हड्डी बन रही हूं ।

मुझे लगता है ।

यह आपसे कुछ बात करना चाहते हैं ।लेकिन मेरी मौजूदगी में कुछ बोल नहीं पा रहे हैं? 

कंदील  ने लाएबा के कान में। सरगोशी करते हुए कहा।

कंदील की इस हरकत पर वह लड़का तिरछी निगाह करके कंदील और लाएबा को देखने लगा।

आप लोग आराम से बैठकर यहां बात कीजिए मुझे नहीं लगता कि आप लोग मेरी मौजूदगी में एक दूसरे से बात कर सकते हैं।

कंदील बेंच से खड़ी हो गई।

मैं अभी 5 मिनट में आती हूं लाएबा ,कंदील ने कहा। और कहकर वहा से जाने लगी। 

कंदील तुम अच्छी तरह से जानती हो ना कि अगर आगा जान को पता चला कि हम दोनों यहां अकेले बैठकर बात कर रहे हैं।

और तुम यहां से बहाना बनाकर गायब हो चुकी हो तो वह बहुत नाराज होंगे।

लाएबा ने अपने डर का मुजाहिरा करते हुए कहा। 

क्योंकि वह आगा जान की आदत से अच्छी तरह से वाकिफ थी?

ऐसा कुछ नहीं होगा लाएबा में ऐसा नहीं होने दूंगी आप भरोसा रखिए मेरा। 

कंदील ने मुस्कुरा कर। आंखें बंद करते हुए कहा। 

और वहां से जाने के लिए मुड़ गई।

और वह दो ऑखे  बहुत गौर से उसे जते हुए देख रही थी।

न जाने क्यों उसे यहां से कंदील का जाना अच्छा नहीं लगा था?

उसको  अच्छा लग रहा था कंदील की मौजूदगी में। अब वो लाएबा से क्या बात करता? 

लेकिन कुछ कहना फुजूल था

कंदील  यहां से जा चुकी थी।

और वह कंदील से भी क्या बात करता उसकी तो समझ में नहीं आ रहा था। 

क्योंकि यहां तो वह लाएबा के लिए यहा आया था?

और उसे कन्दील पसन्द आ गई थी।

पहली बार ऐसा हुआ था।

के उसकी समझ मे उसकी मॉम की पसन्द नही आई थी।

नही तो बचपन से अब तक उसकी लाईफ के हर फैसले उसके पेरेंट्स ही करते थे।

अजीब सी कशमकश मे फस गया था वो 

उसे यहा कंदील के आलावा कुछ नजर ही नही आ रहा था।

कंदील उसने अपने मुंह मे दोहराया 

और उसके होठो पर एक प्यारी सी स्माइल आ गई।



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