Kandeel part ,13

 




डॉक्टर बख्श अपने उसे रूड अंदाज में जाने लगे। 

यह भी उनकी पर्सनैलिटी का एक हिस्सा था।

कि वह बहुत कम ही मुस्कुराते थे।

हमेशा  उनके फेस पर सीरियस तास्सुरात  रहते थे ।

हर वक्त सीरियस नजर आने वाले डॉक्टर बख्श।

अपने अंदर बहुत दर्द समेटे हुए थे। 

इस दर्द ने उनको तब्दील करके रख दिया था।

कोई नहीं जान सकता था। 

कि उनके इतने सख्त होने की क्या वजह थी?

बस कुछ सच्चाई ऐसी थी। 

जिसे डॉक्टर बख्श के अलावा कोई नहीं जानता था।

उस एक सच्चाई ने डॉक्टर बख्श को पूरा। चेंज करके रख दिया था।

डॉ बक्श अपने केबिन में अकेले बैठकर।  उसकी  सोच मे गुम थे? 

उन्होंने फोन को की स्किन को अपने हाथ से साफ किया। उस पर चमकती हुई तस्वीर को देखने लगे। 

उन्हें वह वक्त याद आ गया। 

जब पहली बार, इस शख्सियत को उन्होंने देखा था। कैसे भूल सकते थे वह यह सब?


डॉक्टर बख्श को वह सब याद आने लगा। 

बहुत कुछ साल पहले की थी । 

ये उस वक्त की बात थी।

जब उसके मॉम डैड बहुत खुश थे। 

खुश हो भी क्यों ना क्योंकि डॉक्टर बख्श रिश्ते के लिए?

  मॉम, ने बहुत अच्छी लड़की को देखा था। 

उनको वह लड़की देखते ही पसंद आ गई थी। 

डॉक्टर बख्श और उनके वालिदैन ने उस लड़की के घर ले जाने के लिए।

बहुत मुश्किल से   डॉक्टर बख्श को तैयार किया था। हालांकि dr.baksh ने साफ लफ्जों में कह दिया था। 

कि उन्हे लड़की देखने की कोई जरूरत नहीं है ।

जो भी आपको दोनो पसंद है उसके लिए वह दिल से हां कर देंगे। 

लेकिन उसकी मॉम चाहती थी ,कि एक बार वह लड़की से मिलले और उसको देख ले। 

मजबूरन डॉक्टर बख्श को तैयार होना पड़ा था।

उनके साथ उसे लड़की के घर जाने के लिए। 

और वह राजी भी हो गए था। 

क्योंकि उसका कोई पास्ट नहीं थे? 

उन्होंने  तो अब तक सीधी-सादी लाइफ जी थी।

वह 1 साल बाद प्रैक्टिस के लिए इंडिया से बाहर चला जाने वाले थे। 

इसलिए उसके पेरेंट्स की मर्जी थी। 

कि वह शादी करके ही बाहर जाए। 

अपनी दुल्हन को साथ लेकर।


जैसे ही उसकी अपनी डेशिन्ग पर्सनालिटी के साथ दरवाजे के अंदर एंट्री हुई।

सामने ही वह उस लड़की को देखकर ठिठक गये। 

उनकी आंखें कुछ पल के लिए।

बिना पलक झपक है उसको देखते ही रही।

कमसिन सी नाजुक नाजुक बड़ी-बड़ी काली आंखों वाली वो लड़की। 

उम्र में डॉक्टर बख्श से काफी कम नजर आ रही थी।

डॉक्टर बख्श को देखकर उसकी आंखों में चमक आ गई।

और वह अंदर की तरफ लगभग भागती हुई चली गई।



खट खट खट

डॉ बख्श अभी इन सोचो से बाहर नहीं आते।

अगर बाहर दरवाजे पर खटखट की आवाज ना होती। 

यस कमिंग।

वह अपनी पुरानी यादों से बाहर आते हुए बोले।

उन्होंने मोबाइल की स्क्रीन पर किस किया।

और अपना फोन। बंद करके दोबारा अपनी पॉकेट में रख लिया।

उस चेहरे को देखकर उनके लबो पर अपने आप हंसी आ जाती थी।

जी सर फरमाइए। 

डॉ फरहान ने अंदर आते हुए डॉक्टर बख्श से कहा।

ह्म्म्म्म डॉक्टर  बख्श ने लंबा हममममम कहां?

डॉ फरहान आज फिर वह जूनियर डॉक्टर गायब है।

क्या आपने उनको मेरे रूल्स से आगाह नहीं किया था?

या फिर कल वाली पनिशमेंट को वह भूल गई हैं।

डॉ फरहान समझ चुके थे ,कि डॉक्टर बख्श कंदील के बारे में पूछ रहे थे।

सर पता नहीं क्या प्रॉब्लम है ना तो उनका फोन रिसीव हो रहा है।

और ना ही उनका एसएमएस सीन हो रहा है?

डॉक्टर साहब मैं सुबह से काफी कॉल्स और एसएमएस कर चुका हूं। 

बट डॉक्टर बख्श नो रिप्लाई।

फरहान ने पूरी बात उन्हें तहसील से बताते हुए कहा।

कुछ ज्यादा ही आपकी डॉक्टर  अनरिस्पांसिबल है।

डॉक्टर बख्श के माथे पर शिकन आ गई थी।

एक तो हॉस्पिटल से गैर हाजिर है। 

उस पर से ना तो कॉल रिसीव हो रही है। और ना एसएमएस सीन हो रहे हैं। 

डॉ बख्श सख्त लहजे में बोले थे।

आप जाइए और पता कीजिए कि क्या प्रॉब्लम है? 

डॉक्टर बख्श ने फरहान को हुकुम सुनते हुए कहा।

जी सर फरहान उनकी हां में हां मिलाते हुए। रूम से बाहर चले गए।

डॉक्टर बख्श कुर्सी से टेक लगाकर आंखें बंद करके। रिलैक्स होने की कोशिश करने लगे। 

क्योंकि अभी कुछ देर पहले जो कुछ भी उन्हें याद आया था? वह उन्हें काफी देर बेचैन करने के लिए काफी था😞😞😞😞😞😞😞😞।




वह अपने कमरे के बैड पर बेसुध उल्टी लेटी हुई थी। उसके लंबे बाल पुरे बैड पर बिखरे हुए थे।

इस वक्त जो उसके दिलों दिमाग में जंग चल रही थी ।

उससे कन्दील ही वाकिफ थी।

उस शख्स के नाम का ही दर्द कंदील के लिए बहुत था।

तो उसका सामना करने की तो कंदील के जिस्म मे जान ही बाकी नहीं रहती ।

   वह उस जालिम शख्स का कभी सामना नहीं करना चाहती थी।

जिसने  ,कंदील को बेईन्तेहा नफरत करती थी।

जितना वह उससे डरती थी उससे कहीं ज्यादा उससे नफरत भी करती थी।


कंडिया सैफ को कैसे माफ कर सकती थी ।

जिस ने उसे सिर्फ दर्दही दर्द दिया था? वह सब कुछ बर्दाश्त कर सकती थी लेकिन यह बात कैसे बर्दाश्त कर सकती थी ।के उस शख्स ने उसकी ईगो को हर्ट किया था कैसे माफ कर सकती थी वो उसे।


कंदील दोबारा उसे शख्स के बारे में सोचने पर मजबूर होने लगी। 

उसे  अपने पास्ट की याद आने लगी।

सब कुछ तैयार है ना कुछ रहे तो नहीं गया।

तैयारी में कोई कमी तो बाकी नहीं रह गई। 

नवाब साहब की रौबदार आवाज पूरी हवेली के बीचो बीच गूंज रही थी। 

सबने महसूस किया आज वह बहुत खुश नजर आ रहे थे। बजाहिर जब वह खुश होते थे तो एहसास नहीं दिलाते थे किसी को।

मगर उनकी रिएक्शन से सबको इल्म हो जाता था। कि वह खुश है।

लिहाजा आज वह काफी खुश नजर आ रहे थे। और उनके खुशी होने की वजह यह थी। 

के उनकी बड़ी पर पोती को? 

देखने लड़का और उसके पेरेंट्स आ रहे थे।

बात तो लगभग पक्की ही थी।

मगर उन्होंने फॉर्मेलिटी के तौर पर बोल दिया 

के आप लड़के को लेकर हवेली पर आ जाए।


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