Kandil part-9
अब क्या चाहते हो तुम मुझसे?
वह अपने दिल में। बहुत तेज सवाल कर रही थी।
कंदील , सैफ हारून से उन सवालों का जवाब मांग रही थी।
कंदील के तो वहमो गुमान से भी यह बात निकल चुकी थी कि सैफ हारून इंडिया वापस आ सकता है।
आगा जान के अल्फाज हथौड़े की मानिंद कंदील के कानो पर,बरस रहे थे।
वो इन्डिया वापस आ चुका,है
सैफ हारून वापस आ चुका है।
नही नही ये गलत है ये नही हो सकता उसने वादा किया था।
मुझसे,कहा,था उसने के अब मै यहा कभी वापस नही आऊगा।
,सुना कंदील जफर तुमने नफरत करता हूं ।
मै तुम्हे
नफरत है मुझे तुमसे कन्दील ।
सैफ के नफरत भरे चिखते हुए लफ्जो से कंदील के कान मानो फट जाएंगे ।अब
कंदील ने अपने कानो पर कस कर हाथ रख लिए
वो सदमे के आलम मे अपने बैड पर लेटी थी ।
कुछ पुरानी यादें उसकी आंखों के सामने किसी फिल्म के सीन की तरह लहराने लगी।
ये उस वक्त की है जब कंदील कॉलेज का सेकिन्ड ऐयर मे थी।
और उसकी जिंदगी में हर तरफ खुशियां ही
खुशियां थी।
आगा जान की तो वो हमेशा ही लाडली थी।
हवेली मे कुछ मेहमान आ रहे थे ।
तय्यारी देखकर लग रहा था ।
मेहमान कुछ ज्यादा ही खास है।
लेकिन कन्दील को नही पता था वो किस खास मकसद से हवेली मे तशरीफ ला,रहे है।
लेकिन लाएबा के चेहरे पर कुछ अलग ही तरहा की चमक थी।
और लाएबा के चेहरे की चमक का राज भी तब खुल गया।
जब ताई अम्मा ने आकर कहा।
लाएबा ठीक से तैयार होना। वो खास तौर पर तुम्हें देखने के लिए ही हवेली पर आ रहे हैं।
तब जेबा और कंदील को यह बात पता चली थी।
कि वह खास मेहमान लाएबा के रिश्ते के लिए हवेली आ रहे हैं।
ताई अम्मा के जाते ही। जेबा ने लाएबा को छेड़ना शुरू किया।
ओ हो तो यह बात थी।
मतलब आप पहले से जानती थी।
जो स्पेशल मेहमान आ रहे हैं। यह आपके रिश्ते के लिए आ रहे हैं।
चुलबुली घुंघराले बालों वाली। दरमियांनी कद की जेबा बहुत ही स्मार्ट लग रही थी।
और लाएबा के चेहरे पर तो मानो, किसी ने ब्लश कर दिया हो।
हां मुझे मालूम तो था।
लाएबा ने शरमाते हुए अपनी निगाहों को नीचे किया।
अच्छा तो आपको मालूम था।
और आपने हमें बताना गवारा नहीं समझा।
वेरी बैड लाएबा।
कंदील ने कहा।
अरे नहीं कंदील वो मम्मी ने मना किया था।
जब तक रिश्ता तय नहीं हो जाता।
तब तक किसी से भी कुछ कहने की जरूरत नहीं है।
लाएबा ने पूरी बात कंदील को बताते हुए कहा।
ओ अच्छा तो अब बात यहां तक पहुंच गई है।
और हम लोगों को कानो कान खबर नहीं हुई।
जेबा ने कन्दील की तरफ देख कर ऑख दबाते
हुए कहा।
अरे यार ऐसा कुछ भी नहीं है।
तुम दोनों तो मेरे पीछे ही पड़ गई।
लाएबा को उन दोनों की बातों से उलझन हो
रही थी?
अरे मेरी प्यारी लाडो रानी
कन्दील ने अपनी बाहों का हार लाएबा की गले में डालते हुए कहा।
उन दोनो को लाएबा के लिए बहुत खुशी हो रही थी।
कंदील और जेबा को लाएबा को छेड़ने में बहुत मजा आ रहा था।
और उनके छेड़ने से लाएबा बेइंता शर्मा रही थी।
हवेली के सारे लोग बहुत खुश थे।
मेहमानों के आने का इंतजाम हो चुका था।
सारी तैयारी है पूरी हो चुकी थी।
सब उनके आने का इंतजार कर रहे थे।
जेबा कंदील लाएबा को तैयार करने में उसकी मदद कर रही थी।
वह काफी ड्रेस पहन कर देख चुकी थी।
बार-बार जेबा और कंदील उसकी ड्रेस को रिजेक्ट कर रही थी।
अब लाएबा का मूड खराब होने लगा था।
तभी ताई अम्मा ने आकर बताया।
मेहमान आ चुके हैं।
लएबा क्या बचकाना हरकतें हैं
तुम अभी तक तैयार क्यों नहीं हुए हुई?
ताइ अम्मा को लाएबा पर बहुत गुस्सा आ रहा था। क्योंकि वह तीनों पछले 3 घंटे से कमरे में बन्द थी ।
और अभी तक लाएबा तैयार नहीं हुई थी?
उफ़ अल्लाह क्या करूं मैं तुम लोगों का, ना तो तुम खुद तैयार हुई हो ।
और ना ही तुमने लाएबा को तैयार किया है?
वो उन तीनों पर काफी नाराज हो रही थी।
निकलो तुम यहां से और जाओ अपने-अपने रूम में जाकर तैयार हो।
और लाएबा तुम 10 मिनट में तैयार हो जाओ।
वो वार्निंग भरे लहजे में लाएबा से बोली।
और उनकी नाराजगी को देखते हुए।
कंदील और जेबा खामोशी से उनके पीछे से
निकल गई।
जब दरवाजे पर जोरो से दस्तक होने लगी।
तो कन्दील दिल अपनी पुरानी यादों से वापस आई।
उसने सोचते हुए दरवाजे की जानिब देखा।
कौन है ।
बामुश्किल उसके लबो से यह बात निकली थी ।
क्योंकि इस वक्त वह माजी की बहुत भयानक यादों से वापस आई थी कंदील?
कंदील मैं हूं लाएबा दरवाजा खोलो।
लाएबा ने बाहर से कहा।
वह बहुत मुश्किल से उठी क्योंकि उसको ऐसा लग रहा था कि उसके जिस्म ने साथ देना बंद कर दिया है।
मानो उसके पैरों में मनो मनो भोज शामिल हो गया हो?
वह अपने अंदर हिम्मत जुटाते हुए दरवाजे पर आई।
और दरवाजे को खोल दिया।
दरवाजा खोलते ही सामने लाएबा मौजूद थी।
लाएबा ने जब कंदील का रोता हुआ चेहरा और सूजी आंखों को देखा।
तो वो कुछ सोच में पड़ गई थी।
कंदील क्या हुआ मेरी जान?
लाएबा ने बहुत प्यार से कंदील को कंधों से पकढ़ते हुए कहा।
और लाएबा के यह लफ्ज कंदील को पिघलाने लगे।
उसे तो इस वक्त किसी के कंधे के सहारे की जरूरत थी।
वह सिसक सिसक कर रोते हुए।
लाएबा से लिपट गई।
लाएबा ने जब उसको इस तरह रोते हुए देखा ।
तो वह घबरा गई।
कंदील कंदील क्या बात है ।
कंदील बताओ मुझे क्या बात है?
उसकी समझ नहीं आ रहा था कि कन्दील इस तरह क्यों रो रही थी?
क्योंकि आमतौर पर कंदील इस तरह कभी रोती नहीं थी?
कंदील ने लाएबा की बात का कोई जवाब नहीं दिया ।और अपना रोना जारी रखा।
लाएबा उसको देखकर घबरा गई थी



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