कंदील/ kandil part -4
सो एनीवे डॉक्टर आज के लिए इतना काफी है। बाकी मैं आपको समझा दूंगा।
डॉक्टर बख्श अपनी चेयर से उठते हुए बोले।
बाकी के सारे डॉक्टर्स भी डॉक्टर बक्शी को देखकर उठ गए।
डॉक्टर बख्श की नजर अपने बिल्कुल सामने खड़ी कंदील पर गई। वह दरवाजे के बीचो-बीच खड़ी थी। उसकी निगाहें नीचे थी।
और एक बात और आप सबको समझा दूं मैं।
के अपने दिमाग में से यह ख्याल बिलकुल निकाल दीजिए कि आप किसी नवाब खानदान से ताल्लुक रखते हैं?
यह बात उन्होंने कंदील पर कही थी।
कंदील ने यह बात सुनकर एक नजर डॉक्टर बख्श को दिखा। उनके चेहरे पर मार्क्स लगा हुआ था।
सिर्फ आंखें दिखाई पड़ रही थी। कंदील समझ चुकी थी यह बात सिर्फ उसके लिए ही कही गई है।
डॉ खान यहां सारे डॉक्टर के साइन मुझे अभी के अभी चाहिए। उन्होंने एक फाइल डॉक्टर खान को देते हुए कहा।
डॉक्टर ने वो फाइल डॉक्टर बख्श के हाथ से ले ली।
और सारे डॉक्टर्स के साइन करवाने लगे।
सारे डॉक्टर के साइन करवाने के बाद। उन्होंने वह फाइल डॉक्टर बख्श को वापस कर दी।
डॉ खान आपने अपना काम ठीक से नहीं किया है।
अधूरा है आपका काम अभी।
और मुझे अधूरे काम करने वाले लोग बिल्कुल अच्छे नहीं लगता।
डॉक्टर बख्श ने थोड़े सख्त। लहंगे में यह बात डॉक्टर खान से कही थी।
बट डॉक्टर साहब सारे लोगों के साइन यहां पर मौजूद है। डॉक्टर खान ने कहा।
जी नहीं डॉक्टर खान सारे लोग नहीं।
कंदील जफर के साईन यहां मौजूद नहीं है। उन्होंने कंदील के नाम पर जोर देते हुए का।
ओ सॉरी सर।
डॉक्टर खान ने कहा।
और फाइल दोबारा कंदील की तरफ लेकर बढ़ने
लगा।
डॉक्टर कंदील साइन प्लीज।
डॉ समीर खान ने फाइल कंदील को देते हुए कहा।
कंदील ने पेन लेकर फाइल पर साइन कर दिए।
आज पहले दिन ही डॉक्टर। बख्श ने तुम्हारी क्लास ले ली कंदील।
समीर आहिस्ता से मुस्कुरा कर बोला।
और फाइल कंदील के हाथ से वापस ले ली। उसने काफी हल्के से ये अल्फाज कहे थे जो सिर्फ कंदील ही सुन सकती थी।
कंदील को बहुत बुरा फील हो रहा था।
के आज पहले दिन ही डॉक्टर बख्श ने उसे पनिशमेंट किया था?
बहुत ही रूड बिहेव किया था ।
उन्होंने कंदील के साथ इस लिहाज से कंदील अंदाजा लगा सकती थी।
की डॉक्टर बख्श किस तरह सख्त मिजाज के इंसान है।
डॉक्टर बक्श रूम से बाहर निकल रहे थे।
वो बिल्कुल कंदील के नजदीक से निकले रहे थे।
वह कुछ मिनट के लिए कंदील के पास रुक गए।
और तिरछी निगाह करके कंदील को देखने लगे।
कंदील ने भी तिरछी निगाह करके उनकी तरफ देखा।
इतनी सख्त निगाहों से वह कंदील की तरफ देख रहे थे।
के मिनट से पहले ही कंदील ने अपनी नजरों को झुका लिया।
डॉक्टर बक्श भी अब आगे निकल चुके थे।
बाकी सारे डॉक्टर्स भी उनके पीछे-पीछे निकल रहे थे।
कंदील ने शुक्र की सांस ली।
अल्लाह का शुक्र है चले गए।
कंदील के मुंह से यह लफ्ज से निकले थे।
बेशक हर बात पर अल्लाह का शुक्र है।
डॉ सारा ने कंदील के नजदीक आकर कहा।
कंदील डॉक्टर सारा को देखकर मुस्कुराने लगी।
बट माय डियर कंदील बला अभी टली नहीं है।
डॉक्टर सारा ने अपने हाथ कंदील के कंधों पर रखकर हुए उसे डरते हुए कहा।
क्या मतलब यार?
कंदील ने अपनी बड़ी-बड़ी आंखों को झपकते हुए कहा। सीधी सी बात है यार।
तुमने पहले दिन ही गलती करके। डॉक्टर बख्श की निगाहों में आ गई हो तुम।
और हम सब ने देखा उन्होंने जिस तरह से तुमसे बिहेव किया।
और वह जिस तरह से तुम्हें देख रहे थे।
उसको देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है। के वो तुमसे सख्त नाराज है?
डॉ सारा ने कहा।
डॉक्टर सारा की बात सुनकर।
कंदील और कशमकश में पड़ गई थी।
क्योंकि उसे अच्छी तरह से मालूम था?
डॉ बख्श बहुत ही सख्त मिजाज किस्म के
डॉक्टर हैं।
सो माय डियर स्वीट कंदील।
अपनी पनिशमेंट के लिए तैयार रहिए आप।
डॉ सारा को इस वक्त कंदील की शक्ल देखकर हंसी आ रही थी।
अभी वह सारा से अपनी बातों में मुखातिब थी।
के डॉक्टर समीर खान ने उसे आकर कहा?
डॉक्टर कंदील जफर।
आपको डॉक्टर बख्श अपने केबिन में बुला रहे हैं।
यह सुनकर तो कंदील की हार्टबीट जैसे रुकने को थी।
ओके डॉक्टर खान जाती हूं।
मैं डॉक्टर बख्श के रूम में कंदील ने बिना देरी किए कहां?
अल्लाह बस रैहम फरमाना तू।
वह अपने दिल में दुआ करने लगी।
और डॉक्टर बख्श के केबिन की तरफ। बढ़ गई।
मे आई कम इन सर।
कंदील ने डरते डरते डॉक्टर बख्श के रूम के बाहर।
खड़े होकर कहा।
यस कमिंग।
अंदर से भारी भरकम आवाज आई।
कंदील ने आंखें बंद करके खुद को रिलैक्स किया।
और अंदर रूम में जाने लगी।
बट अन्दर से कंदील डरी और सहमी हुई थी।
कंदील जैसे जैसे अपने कदम आगे बढ़ा रही थी।
उसके दिल की धड़कन की रफ्तार उतनी ही तेजी से बड़ रही थी
कंदील सफर चुकी थी के डॉक्टर बख्श उसे पनिशमेंट देने के लिए ही यहा बुला रहे है।
कंदील कुछ लम्हे के लिए रूकी।
अल्लाह तू इस जालिम शख्स के दिल मे रहम डाल दे।
कंदील दिल मे दुआ कर रही थी।
क्योकी जिन नजरो से डॉक्टर बख्श ने कंदील को देखा था।
उनकी ,उस नजरो से कंदील को वहशत हो रही थी।
फिर कंदील ने हिम्मत जुटाते हुए अपने कदमो को आगे बढ़ाया।
वो शख्स कंदील की इस हरकत को नोट कर रहा था।
और अपने दिल मे खुश हो रहा था।
उसकी एक नजर से ही कंदील उससे खौफ जदा हो गई थी।
ये उस शख्स की जीत का पहला कदम था।
वो शख्स बूक तो पकड़े हुए था।
मगर उसका ध्यान पूरी तरह से डॉक्टर कंदील जफर पर था।
जिसका बेताबी से वो इन्तजार कर रहा था।
ताकि उस डॉक्टर कंदील जफर को अच्छी तरह पनिशमेंट दे सके।
उसको कंदील के कदमो की आहट सुनाई पड रही थी।
इस वक्त उस शख्स के चाहरे पर बहुत गहरी स्माइल थी।
कंदील ने खुद से ही ये मौका डॉक्टर बख्श को दे दिया था।
डॉक्टर बख्श उसकी अच्छी तरह क्लास ले सके।
To be continued......



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