कंदील /Kandil part-3

 कंदील part -3



सरफराज नवाब साहब की हवेली बहुत बड़ी थी।
जिसमें काफी लोग रहते थे। और वह सारे ही। नवाब साहब को बहुत इज्जत और अहमियत देते थे।
उन सब लोगों की नजर में नवाब साहब ने अपनी जिंदगी में कभी कोई गलत फैसला नहीं किया है। मगर नवाब साहब का मानना था कि  उनकी जिंदगी में उनसे गलत फैसला हो गया है। 

जिसका पछतावा उन्हें हमेशा रहता था। और वह गलत फैसला कंदील के हवाले से था। कंदील उनकी सबसे छोटा पोटी थी। जिसका कोई भाई-बहन नहीं था। और उसके वालिदैन भी नहीं थे। नवाब साहब को कंदील से बहुत मोहब्बत थी। उसकी वजह यह थी कि कंदील एक बहुत ही सुलझी हुई। समझदार और कम बोलने वाली लड़की थी। थोड़ा बड़े होने पर ही उसके वालिदैन का साया उसके सर से उठ चुका था।
नवाब साहब के बड़े बेटे सादिक नवाब थे। जिनके सिर्फ तीन बेटे थे।  शफी ,जैन, हाशम,और कोई बेटी नहीं थी।
सभी को हाई एजुकेशन हासिल करने के लिए नवाब साहब ने मुल्क से बाहर भेजा था।
छोटे सफर नवाब थे जिनकी दो बेटियां थी।
लाएबा और जेबा। लाएबा में जितनी समझदार थी जेबा उतनी ही चंचल और शोक थी।
लाएबा की पढ़ाई कंप्लीट हो चुकी थी जबकि जेबा अभी भी एजुकेशन हासिल कर रही थी।
सबसे छोटे नवाब जफर थे जो कंदील के वालिद 
थे।
कंदील बहुत ही खूबसूरत थी। उसकी बड़ी-बड़ी सुनहरी आंखें। लंबी सुतवा नाक। और दूध जैसा सफेद रंग था। और उसके होंठ के पास एक तिल था।
जो उसे और खूबसूरत बनाता था। सबसे बढ़कर कंदील का नेचर था जो बहुत ही अच्छा और प्यार था। वो बहुत कम बोलती थी। लेकिन उसके बोलने का लहजा बहुत अच्छा था। 
और कंदील नवाब साहब की लाडली थी। कंदील ने नवाब साहब से आज तक कभी कोई जिद नहीं की थी।
लेकिन एक फैसला जो नवाब साहब  कंदील के हवाले से कर चुके थे।
वो उसकी जिंदगी के लिए बहुत गलत साबित हुआ था। कंदील ने कभी इस बात का। इल्जाम नवाब साहब को नहीं दिया। मगर नवाब साहाब को खुद इस बात का एहसास था कि यह फैसला उन्होंने कंदील की जिंदगी का। सबसे गलत फैसला किया है।
और उन्हें ईल्म था कि कंदील की आने वाली लाइफ। इस फैसले की वजह से बहुत मुश्किल में पढ़ सकती हैं।
कंदील डॉक्टर बनना चाहती थी। इसलिए नवाब साहब ने उसे डॉक्टर बनाया था।
लोगों का कहना था कि कंदील के आधे मरिज तो उसके नेचर की वजह से ही ठीक हो जाते हैं। उसका नेचर उसकी स्माइल बहुत प्यारी थी।
कंदील अपनी जिंदगी के इस फैसले से वाकिफ तो थी। लेकिन उसने कभी यह नहीं सोचा था कि उसके आगे की लाइफ इस फैसले की वजह से। इतनी डेंजर। इतनी तकलीफ देह हो जाएगी। वो इस फैसले के बारे में सोचना ही नहीं चाहती थी।
उसको लगता था अभी जो चल रहा है वह चलता रहे। आगे जो होगा वह देखा जाएगा। अपनी लाइफ को वह इतना। कठिन नहीं करना चाहती थी। की एक फैसले को सोच सोच कर। खुद को ही परेशान करें।
वह खुद बस खुद को तैयार कर रही थी इस फैसले को फेस करने के लिए। खुद को मजबूत बनाना चाहती थी।


वो  जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचाना चाह रही थी। ट्रैफिक की वजह से उतनी ही लेट हो गई। और उसे बहुत खराब महसूस हो रहा था। क्योंकि सीनियर डॉक्टर के सामने? उसकी रेपुटेशन खराब होगी। 
एक नए सीनियर डॉक्टर हॉस्पिटल में तशरीफ ला रहे थे। इसके बारे में डॉक्टर ने पहले ही सब डॉक्टर को ईत्तिला कर दी थी।
क्योंकी वो सिनियर डॉक्टर अपने टाइम के इतने पाबंद है? एक सेकेंड लेट होने पर किसी को भी पनिशमेंट दे सकते हैं। वह कुछ नहीं सोचते हैं। 
सब डॉक्टर के सामने ही दूसरे डॉक्टर को पनिशमेंट दे देते हैं। लिहाजा फिर भी कंदील लेट हो गई थी। और उसको डर था कि आज पहले दिन ही सीनियर डॉक्टर से उसे पनिशमेंट ना मिले।
कंदील बहुत तेजी से चलते हुए। हॉस्पिटल। मैं उस हाल नुमा दरवाजे।  रूम के दरवाजे के बाहर खड़ी हो गई। और उसने आवाज लगाकर कहा मैं 
आई कम इन सर। 
उसकी आवाज पर सारे ही डॉक्टरों ने उसकी तरफ देखा। 
एक डॉक्टर जो बिल्कुल सामने। चेयर पर बैठे थे। उनका चेहरा फाइल से ढका हुआ था। वो फाइल में कुछ पढ़ रहे थे।
कंदील की आवाज पर उन्होंने फाइल को थोड़ा नीचे करके सामने की तरफ देखा।
वह कुछ सेकंड बहुत गौर से कंदील को देखने लगे।
कंदील को सिर्फ उनकी आंखें दिखाई पड़ रही थी। फिर दोबारा उन्होंने फाइल पर नजर जमा दी। 
लग रहा था जैसे कंदील की बात उन्होंने सुनी ही
नहीं हो।
कंदील को के ऐसे बिहेवियर से डर लगने लगा। 
मे आई कम इन सर।
कंदील ने अपना थूक निकलते हुए डर कर  दोबारा उनसे पूछा।
लेकिन लग रहा था। जैसे इस बार उन्होंने कंदील को सुना ही नहीं हो। 
बाकी के डॉक्टर भी कंदील को रहम वाली नजरो से देखने लगे।
कंदील नीचे निगाह करके मुजरिमों की तरह खड़ी हो गई। उस में इतनी हिम्मत नहीं थी कि दोबारा फिर से कुछ पूछती है।
अजीब किस्म के डॉक्टर है पहले ही दिन मुझे सजा दे डाली।
कंदील के लफ्जो का भी डॉक्टर बख्श पर कोई असर नही हुआ था।
कंदील को आज सुबह वाली आगा जान की बात याद आ गई थी।
आगा जान ने कहा था अपना काम टाइम और ईमानदारी से करो कोई भी तुम्हे पनिशमेंट नही दे सकेगा फिर। 
मगर आज ट्रेफिक की वजह से कन्दील लेट हो गई। 
और पहले ही दिन डॉक्टर बख्श की नजरो मे खटकने लगी।
आई होप के आगे सब कुछ ठीक रहे। 
डॉक्टर बख्श कोई ऐसी पनिशमेंट ना दे मुझे जो मुझे करने मे कोई दिक्कत हो ।
कंदील सोचने लगी थी।
उसे इस बात का बिल्कुल ईल्म नही था। 
के डॉक्टर बख्श के पहले दिन हॉस्पिटल मे कन्दील को ही पनिशमेंट मिल जाएगी।
सारे ही डॉक्टर जानते थे कंदील टाइम की कितनी पाबंद है।
बट आज होना था ऐसा। 
डॉक्टर बख्श की नजरो मे उसकी इमेज खराब होनी थी।
जो अब हो चुकी थी।
कंदील बहुत गहरी सोच मे थी।

To be continued......

वो सोच रही थी आगे क्या होना है।

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