कन्दील / kandeel | Part-1

वह अपने बड़े से कमरे के बीच-बीच काफी देर से इधर से उधर टहल रहे थे। उनके चेहरे को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि इस वक्त वह बहुत ज्यादा परेशान है। बेगम साहिबा खामोश नजरों से उनको इधर-उधर टहलते हुए देख रही थी। 
और उनका परेशानी से  चेहरे के सूरत। पर गौर कर रही थी। 
बेगम साहिबा में इतनी हिम्मत नहीं  उनसे पूछ सके आखिर क्या वजह है जो आप इतनी परेशानी में इधर से उधर टहल रहे हैं?
अक्सर वह जब बहुत ज्यादा परेशान होते थे तो अपने कमरे के बीचों बीच। टहलते थे और इस वक्त भी उनका यही हाल था ।
उनके चेहरे को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि कोई बात उन्हें बहुत ज्यादा परेशान कर रही है। जो कहना वो कहना तो नही चाह रहे हैं मगर उनके चेहरे से वह साफ जाहिर हो रहा था कि कुछ बात ऐसी है। जिसे लेकर वह बेइंतहा परेशानी में है।
नवाब साहब।
बहुत हिम्मत करके बेगम साहिबा ने। उन्से यह लफ्ज कहे थे।
क्योंकि उन्हें डर था कि इस बात से नवाब साहब गुस्सा भी हो सकते हैं?
लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ था नवाब साहाब को गुस्सा नहीं आया था वह परेशानी के मिले-जुले तास्सुरात  के साथ बेगम साहिबा की जानिब  देखने लगे थे। 
और उनके चेहरे को देखकर उनकी आंखों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि वह कुछ कहना चाह रहे हैं लेकिन कहने की हिम्मत नहीं हो रही है।
क्या बात है नवाब साहब ।
आप कुछ परेशान लग रहे हैं?
बेगम साहिबा ने बा मुश्किल हिम्मत जुताते हुए 
कहा।
नवाब साहब खामोश हो गए और बेगम साहिबा को देखने लगे। लग रहा था जैसे सोच रहे हो की बात कहां से शुरू की जाए?
बेगम साहिबा वह आ रहा है। 
वह इंडिया वापस आ रहा है। 
उन्होंने बहुत गौर  से बेगम साहिबा को देखते
हुए कहा।
कौन नवाब साहब कौन वापस आ रहा है? बेगम साहिबा नहीं समझ पा रही थी वह किसके बारे में बात कर रहे हैं।

वह वापस आ रहा है जिसे कंदील सबसे ज्यादा नफरत करती है।
सैफ हारून बख्श इंडिया वापस आ रहा है।
नवाब साहब ने बहुत गौर से। बेगम साहिबा की तरफ देखते हुए यह कहा। 
सैफ का नाम सुनकर बेगम साहिबा सकते में आ
गई। उन्हें अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था कि वह इंडिया वापस आ रहा है।
नवाब सहाब को लग रहा था जैसे बेगम साहिबा की। बोलने की ताकत खत्म हो चुकी है इस वक्त।
उनके सर पर। कोई बम फूटा हो जैसे अभी।
मगर क्यों नवाब साहब वह वापस क्यों आ रहा है? उसको क्या चाहिए यहां से?
बेगम साहिबा ने। अपनी रून्धी हुई आवाज के साथ कहा था।
नवाब साहब ने देखा कि उनकी आंखें नम हो 
गई थी।
अब बोल दीजिए नवाब साहब उसे की उसके लिए यहां कुछ नहीं बचा है। इस हवेली की चौखट पर ।
वह दोबारा अपने कदमों को लाने की भी कोशिश ना करें।
बेगम साहिबा की आंखों से आंसू पटपट नीचे गिर रहे थे और उनकी आवाज गुस्से से कांप रही थी।
नवाब साहब ने शेरवानी से अपने दुपट्टे को ठीक किया और कुछ सोचने लगे।
और अपनी छड़ी को टिकाकर अपनी पुश्तैनी  नहीं कुर्सी पर बैठ गए। बेगम साहिबा उनको देखकर समझ गई थी के अब नवाब साहब कोई ऐसी बात कहेंगे जिससे उनको तसल्ली हो जाए?
क्योंकि उनके बैठने का तरीका था जब कोई बात से वह रिलैक्स हो जाते थे और तसल्ली हो जाती थी तो वह इस तरह ही अपनी छड़ी को टिककर अपने शेरवानी से दुपट्टे को ठीक करके अपनी पुश्तैनी कुर्सी पर बैठते थे
बेगम साहिबा हम कंदील को पता नहीं चलने देंगे कि वह यहां वापस आ गया है।
उसका सामना हार  हरगिज सैफ से नहीं होगा। उन्होंने बेगम साहिबा को तसल्ली देते हुए कहा।
मगर नवाब साहब।
बेगम साहिबा ने बोलने की कोशिश की। तो नवाब साहब हमने उन्हें उंगली के इशारे से बोलने से रोक दिया।
हमने कहा ना बेगम साहिबा के उसका सामना कंदील से हरगिज नहीं होने देंगे हम? 
उन्होंने  अपनी रौबदार आवाज में बेगम साहिबा को यकीन दिलाते हुए कहा।
बेगम साहिबा नवाब साहब की बातों से मुतमईन होने की कोशिश करने लगी। मगर उन्हें अंदर से यह इस बात का डर था। के अगर इन दोनों का आमना सामना हो गया? तो जाने क्या हो जाएगा?
वह खुद को तसल्ली देने लगी।
उन्होंने एक नजर नवाब साहब के चेहरे पर डालकर देखा। वहा उन्हें बहुत सुकून  और तसल्ली नजर आ रही थी।
बेगम साहिब को परवाह नहीं थी कि इस वक्त नवाब साहब क्या सोच रहे हैं उन्हें सिर्फ इस वक्त कंदील के फ्यूचर का ख्याल था? वो कन्दील के बारे में ही सोचने लगी।
कंदील नवाब साहब की जिन्दगी की वो कमजोर कढी थी जिसके आगे नवाब साहब खुद को बहुत बेबस मेहसूस करते थे।
कंदील की जिन्दगी से जुड़ा एक बहुत बड़ा सच था। 
उस सच से हवेली वाले भी वाकिफ नही थे।
आगा जान ही थे जिन्हे वो सच पता था।
इसलिए भी आगा जान को कंदील से बेइन्तहा मोहब्बत थी।
उन्होने अपनी जात से कभी कन्दील को किसी भी चीज की कमी मेहसूस नही होने दी। 
कंदील को एक शहजादी की तरह पाला था आगा जान ने
कंदील की जिन्दगी के हर लम्हे पर उनकी नजर रहती थी।
यहा तक के उसके स्कूल से भी आगा जान ड्राइवर के साथ खुद कंदील को लेने जाते थे।
आगा जान नही चाहते थे, कंदील को उसके वालिदैन की कमी मेहसूस ना हो कभी
हवेली के सारे लोग भी कंदील को बेइन्तहा प्यार करते थे।
सब यही कोशिश करते थे के कन्दील को अपने वालिदैन की कमी मेहसूस ना हो।
मगर एक बहुत बड़ी सच्चाई है ये के आपके वालिदैन की कमी को सारी दूनिया मिल कर भी पूरा नही कर सकती है।
😔😔😔😔😔
सब अपनी तरह से कन्दील को खुश रखने की कोशिश करते 
मगर अपने दिल का हाल सिर्फ कंदील ही जानती थी।
जिस ने बचपन मे ही अपने वालिदैन को नही देखा हो उसकी ख्वाहिश वही दम तोड़ देती है।
कंदील की जिन्दगी मे कई राज थे।
जिसके बारे मे कोई नही जानता था।

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