डिलीवरी के बाद क्या सैफ बदल जाएगा? | कंदील के दिल का डर | Emotional Urdu Novel
आज सारे ही लोग मौजूद थे इस हवेली में।
आगा जान की, गैर मौजूदगी में अजीब सा सन्नाटा फैला हुआ था इस हवेली पर।
जो सबको महसूस हो रहा था।
और कंदील को तो रह रहकर इस बात का ही अफसोस हो रहा था।
की आखिरी वक्त में उसने आगा जान का चेहरा तक नहीं देखा था।
वह आगा जान जिन्होंने कभी उसे किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी थी।
और बड़ी ही प्यार से बचपन से लेकर बड़े होने तक उसकी हर ख्वाहिश पूरी किया थी।
उनका इस तरह से जाना कंदील को हर्ट कर
गया था।
मगर कोई भी अब कुछ नहीं कर सकता था ।
आगा जान जा चुके थे।
जो अल्लाह को मंजूर था वह होना ही था।
और वह हो गया था।
यूं ही अब वक्त भी गुजरने लगा था।
अगर जान जो प्रॉपर्टी की वसीयत कंदील के नाम कर गए थे। हिंदी ने उस वसीयत को पड़ा।
और कंदील को एक बात से बहुत खुशी मिली और सुकून हुआ था।
कंदील के वालिद की जितनी भी प्रॉपर्टी थी ।
आगा जान ने उस प्रॉपर्टी में, दो हिस्से कर दिए थे ।
एक जिल्ले हुमा के नाम और दूसरे कंदील के नाम।
इस बात से कंदील को बेइंतहा खुशी हुई थी।
और जो हॉस्पिटल के नए प्रोजेक्ट के लिए कंदील ने आगा जान से जमीन की बात की थी।
वह जमीन आगा जान ने कंदील के ही नाम
कर दी थी।
डॉक्टर बख्श जब रूम में दाखिल हुए, तो कंदील अपने बैड से टिककर किसी बहुत गहरी सोच में मुब्तिला थी।
डॉक्टर बख्श के रूम में आने का भी कंदील ने कोई रिस्पांस नहीं दिया था।
डॉ बख्श कंदील की तरफ तिरछी निगाह करके देखते हुए वॉशरूम की जानिब चले गए थे।
फिर कुछ मिनट बाद डॉक्टर बख्श जब रूम से बाहर आए तब भी कंदील उसी पोजिशन में डॉक्टर बख्श को बैठी हुई मिली थी।
डॉ बख्श अपने गीले बालों को टॉवल से रगड़ते हुए कंदील के नजदीक आए।
डॉ बख्श इस वक्त सिर्फ लोअर पहना हुए थे उन्होंने शर्ट नहीं पहनी थी।
कंदील इस कदर सोच में गुम थी के डॉक्टर बख्श बिल्कुल कंदील के नजदीक आ चुके थे।
तब भी उसने कुछ रिएक्ट नहीं किया था।
डॉक्टर बख्श कंदील के चेहरे की नजदीक आए और उन्होंने कंदील के गाल पर किस कर लिया।
डॉक्टर बख्श के कंदील के गाल पर किस करने से कंदील जैसे किसी गहरे ख्वाब से बाहर निकली हो।
उसने हैरान होकर डॉक्टर बख्श की तरफ देखा।
ओहहहह आप आ गए।
कंदील ने कहा।
जी हां बेगम साहिबा हम आ गए।
लेकिन हमने देखा कि आपने हमारे आमद का कोई रिस्पांस ही नहीं दिया।
तो हमें फिर खुद ही ऐहसास दिलाना पड़ा कि हम कमरे में दाखिल हो चुके हैं अब।
डॉक्टर बख्श अभी भी उस पर इसी तरह झुके हुए थे।
उससे शिकवा कर रहे थे।
अरे सैफ आपने अभी तक अपनी शर्ट क्यों नहीं पहनी है? कंदील ने डॉक्टर बख्श की बॉडी को ऊपर से न्यूड देखा तो डॉक्टर बख्श से कहा।
क्योंकि मेरा मूड नहीं है मोहतरमा टी-शर्ट पहनने का।
डॉ बख्श ने अपनी एक ऑख को दबाते हुए
कहा।
डॉक्टर बख्श इस वक्त आप,
कंदील उनको ऑख मारते हुए देखकर समझ गई थी ,उनका ईशारा किस तरफ है।
इसलिए बात को अधूरा छोड़ दिया।
डॉक्टर बख्श ने देखा जैसे जैसे कंदील की डिलीवर का वक्त नजदीक आ रहा था।
कंदील गोलू मोलू और खूबसूरत लगने लगी थी।
डॉक्टर बख्श को इस वक्त वो क्यूट लग रही थी।
डॉ बख्श जिस तरह से कंदील को देख रहे थे कंदील उनकी देखने का कुछ और ही मतलब समझ रही थी।
इसलिए वह थोड़ा सा कंफ्यूज हो रही थी।
डॉ बख्श आप किस वक्त आऐ मैंने तो देखा नहीं आपको।
कंदील ने कहा।
मोहतरमा जिस वक्त आप बहुत गहरी सोच में मुब्तिला थी।
तो मै रूम में आया था।
डॉक्टर बख्श ने कहा।
फिर डॉक्टर बख्श कंदील के पास से हटकर।
जस्ट कंदील के सामने बैठ गए थे।
क्या बात है कंदील इतनी गहरी सोच में थी।
तुम ऐसा क्या सोच रही थी?
डॉक्टर बख्श ने कंदील से नॉर्मल सवाल किया था।
ऐसा कुछ नहीं डॉक्टर बख्श बस मन में एक ख्याल आ गया था।
तो मेरी सोच भी गहरी हो गई।
ऐसा भी क्या सोच रही थी जो मेरे आने का भी एहसास नही हुआ तुम्हे,डॉक्टर बख्श ने कहा।
मेरी डिलीवरी हो जाएगी जब हमारा बेबी आएगा।
उसके बाद भी आप मुझे इतनी इंपॉर्टेंस देंगे क्या?
आपकी मोहब्बत मेरे लिए यूं ही बरकरार रहेगी।
कंदील ने अचानक से यह बात डॉक्टर बख्श की आंखों में गौर से देखते हुए कही थी।
और कंदील के इन लफ्जों से डॉक्टर बख्श के माथे पर बल पड़ गए थे।
कंदील मुझे नहीं पता था कि तुम्हारी इतनी छोटी सोच भी हो सकती है।
तुम इतनी बेहूदा बातें भी सोच सकती हो, कंदील मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था।
डॉक्टर बख्श को कंदील की इस बात से गुस्सा आ गया था।
नहीं डॉक्टर बख्श प्लीज मेरी बात को गलत मत समझिए आप।
लेकिन मेरे दिल में एक डर बैठ गया है।
कंदील की आंखों में आंसू झिलमिलाने लगे थे।
जो शख्स मुझसे मोहब्बत करता है।
मुझसे दूर हो जाता है।
इस एक डर ने मेरे दिल में रहा कर ली है डॉक्टर बख्श। कंदील की आंखों से आंसू नीचे गिरने लगे थे।
कंदील की आंखों के आंसू देख के डॉक्टर बख्श का गुस्सा गायब हो गया था।
कंदील प्लीज यार कीप क्वाइट।
मुझे तुम्हारी आंखों के आंसू बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होते हैं।
डॉक्टर बख्श अपने हाथों से कंदील के आंसुओं को साफ करते हुए बोले।
डॉक्टर बख्श ने आगे बढ़ाकर कंदील को अपने सीने से लगा लिया था।
हा सैफ मै डरने लगी हू, की मेरी डिलीवर होने के बाद आप मुझे छोड़ तो नही देंगे।
कंदील डॉक्टर बख्श के गले लग कर उनसे कह रही थी।
ये एक सोच कंदील को कई दिन से परेशान कर रही थी।
कंदील बेवकूफो वाली बाते क्यो सोचने लगती हो तुम।
जिस दिन भी ऐसा हुआ मै तुम से अलग हुआ तो फिर मेरे जिन्दा रहने का कोई मकसद ही नही बचेगा।
डॉक्टर बख्श ने कंदील को खुद से अलग करके उसे देखकर कहा।
रोने से कंदील की नाक लाल हो गई थी।
डॉक्टर बख्श ने प्यार से उसकी नाक छेड़ा।
✨ आगे कहानी में क्या हो सकता है?
कंदील के डर को दूर करने के लिए सैफ उसे और भी प्यार और भरोसा देगा। इसी बीच कंदील की डिलीवरी का वक्त करीब आएगा और पूरा परिवार नए मेहमान के स्वागत की तैयारी करेगा। लेकिन शायद एक नया राज या कोई पुराना दुश्मन फिर से उनकी खुशियों में तूफान लाने की कोशिश करे।
🌹 Next Short Part:
डॉक्टर बख्श ने मुस्कुराकर कंदील की लाल नाक को फिर से छेड़ा।
"पागल लड़की, मैं तुमसे दूर जाने का सोच भी नहीं सकता।"
कंदील ने नम आंखों से उनकी तरफ देखा।
"सच कह रहे हैं आप?"
"मेरी हर खुशी तुमसे शुरू होती है और तुम पर ही खत्म होती है।"
इतने में कंदील को अचानक पेट में हल्का सा दर्द महसूस हुआ। उसने घबराकर सैफ का हाथ पकड़ लिया।
"सैफ… मुझे कुछ अजीब लग रहा है…"
डॉक्टर बख्श का चेहरा एक पल में बदल गया।
"कंदील… क्या तुम्हारा दर्द शुरू हो गया है?"
जारी…
🌹 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
सच्ची मोहब्बत भरोसे और साथ से मजबूत होती है।
अपनों को खोने का डर इंसान को कमजोर कर देता है, इसलिए अपने प्रियजनों को हमेशा भरोसा देना चाहिए।
जिंदगी में जो अल्लाह को मंजूर होता है, वही होता है, इसलिए सब्र और यकीन बहुत जरूरी है।
💖 Readers Ke Liye Shukriya Message:
मेरी प्यारी रीडर्स, आपकी मोहब्बत, दुआओं और सपोर्ट के बिना यह कहानी अधूरी है। आप सभी का दिल से शुक्रिया, जो हर नए हिस्से का बेसब्री से इंतजार करते हैं। उम्मीद है कि आगे की कहानी भी आपको उतनी ही पसंद आएगी। अपना प्यार और सपोर्ट यूं ही बनाए रखिए। ❤️📚



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