Kandeel, part, 22
डॉक्टर बख्श के चेहरे पर एक गहरी मुस्कुराहट आ गई थी।
क्योंकि अभी जो हालात कंदील की उनको देखकर हुई थी?
काफी हद तक डॉक्टर बख्श की समझ में आ गया था। कन्दील का रिएक्शन उन्हें देखकर ऐसा क्यों हो रहा है?
कहां तक मुझे बचोगी तुम कन्दील?
अब तुम्हारे हर कदम पर मैं तुम्हारे साथ चलूंगा।
देखता हू ,तुम मुझसे किस तरह भागने की कोशिश करती हो।
और जितना तुम मुझसे भगोगी। मैं उससे ज्यादा तुम्हारे नजदीक आऊंगा।
हर उस लम्हे का हिसाब मुझे तुमसे लेना है कंदील।
जिस लम्हे में मैं तड़पा हूं।
जिस लम्हे में तुमने मुझे मेरे प्यार के लिए तड़पाया है ।कन्दील जफर।
कैसे भूल सकता हूं मैं हर को बात?
जो तुमने मेरे साथ किया था।
जिसकी वजह से मैं यहां से चला गया था।
तुमने तो सोच लिया होगा, कि मैं कभी वापस नहीं आऊंगा।
मै अपनी शक्ल तुम्हें कभी नहीं दिखाऊंगा।
लेकिन नहीं कंदील।
अब तुम्हें मेरी शक्ल को देखना होगा।
और मुझे बर्दाश्त करना होगा।
बहुत आजादी और बेफिक्री की लाइफ गुजार ली तुम ने मेरे बगैर मगर अब नही।
डॉक्टर बख्श ने अपने ही एक हाथ से अपने दूसरे हाथ पर मुक्का मारते हुए कहा।
अचानक से उन्होंने अपनी आंखों को शिद्दत से बंद किया।
उनकी आंखों से दो कतरे आंसू के बह कर नीचे गिर गए थे।
डॉक्टर बख्श जैसा इंसान इस वक्त, दर्दनाक कैफियत से गुजर रहा था।
डॉक्टर बख्श वक्त से कुछ वक्त पीछे पहुंच गए ।
और सोचने लगे।
उन्होंने तो बहुत शिद्दत और अपनायत से किसी को बहुत चाहा था।
वो पहली चाहत थी उनकी, लेकिन उस शख्सियत ने डॉक्टर बख्श को धोखा दिया था।
डॉ बख्श एक सीधे साधे किस्म और अच्छे नेचर वाले इंसान थे।
लेकिन उस एक इंसान की वजह से, डॉ बख्श पूरी तरह तब्दील हो चुके थे।
तुम क्यों नहीं समझते बेटा वह लोग तुमसे अपनी बेटी का रिश्ता नहीं करना चाहते?
फिर तुमने क्यों जिद पकड़ ली है।
उससे शादी करने की?
उनकी मॉम उन्हे समझा रही थी।
मॉम आप अच्छी तरह से एक बात जानती है।
मैंने कभी किसी चीज के लिए जिद नहीं की।
लेकिन अगर कोई चीज मेरी ईगो बन जाए।
तो फिर मैं अपनी ईगो को हर्ट नहीं होने दे सकता।
वो लोग भहले ही मुझसे अपनी बेटी का रिश्ता ना करना चाहते हो।
मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता।
मुझे उसकी फैमिली से कोई मतलब नहीं।
मुझे सिर्फ उससे मतलब है।
एक लम्हे के लिए वह खूबसूरत और प्यारा सा चेहरा डॉक्टर बख्श की आंखों के सामने लहराने लगा।
जिसको हासिल करने के खातिर डॉक्टर बख्श कुछ भी करने के लिए तैयार हो गए थे।
और देखिएगा आप।
मै उसे शादी करूंगा, और आपकी बहू बनकर रहूंगा। डॉक्टर बख्श ने कहा।
डॉक्टर बख्श के चेहरे पर एक हल्की सी इस्माईल आ गई।
यह हल्की सी स्माइल डॉक्टर बख्श की शख्सियत को चार चांद लगा दे थी।
बेटा तुम इस तरह हमें जिल्लत और रुसवाई का सामना क्यों करवा रहे हो?
जब उन्होंने रिश्ते लिए मना कर दिया है ।
वह तुमसे अपनी बेटी का रिश्ता नहीं करेंगे।
फिर भी तुम जिद पर आ गए हो।
डॉ बख्श की मां रोऑसु होते हुए बोली।
मॉम प्लीज आप तो कम से कम मुझे समझने की कोशिश कीजिए।
आप वह शख्सियत है जो मुझे अच्छी तरह समझती है।
और अगर आप भी ऐसी बातें करेंगी।
तो मै बिल्कुल अंदर से टूट जाऊंगा।
डॉक्टर बख्श दीवार पर जोर से मुक्का मारते हुए बोले।
एक लम्हे में ही उनकी हंसी गुस्से में तब्दील हो गई थी। उनको अपनी मॉम का इस तरह बोलना अच्छा नहीं लगा था।
वह चाहते थे कि उनकी मॉम उन्हें पूरी तरह से सपोर्ट करें।
बेटा तुम्हारी फीलिंग से मैं अच्छी तरह वाकिफ हूं।
लेकिन तुम समझो इस बात को।
मेरा रिलेशन उनकी फैमिली से बहुत अच्छा है।
वह हमें बहुत इज्जतदार लोग समझते हैं।
और तुम्हारी ऐसी हरकत करने से सोचो हमारी गिनती किन लोगों में करेंगे।
वो डॉक्टर बख्श को हर तरह से समझने की कोशिश कर रही थी।
मॉम प्लीज कुछ मत कहिए आप।
क्योंकि मैं कुछ नहीं सुन सकता?
मुझे इस वक्त उसके सिवा कुछ नजर नहीं आ रहा है।
वह अपनी मॉम की भी कोई बात मानने को तैयार नहीं थे।
आप ये समझ लो वह मेरे जिद और जुनून दोनों बन चुकी है।
फिर से वह खूबसूरत और प्यारा चेहरा डॉक्टर बख्श की आंखों के सामने लहराने लगा था।
उसका प्यार से बात करना और उसका मुस्कुराना।
वह इन चीजों को इग्नोर नहीं कर सकते थे।
और उसे पाने के खातिर मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूं।
डॉक्टर बख्श की आंखों में ऑसू थे।
या अल्लाह मेरी एक ही चाहत है ।
जिसे मैंने पूरे खुलूस और ईमानदारी के साथ चाहा है। सिर्फ तू मेरा साथ देना।
मुझे किसी की कोई जरूरत नहीं।
डॉ बख्श अल्लाह ताला से दुआ करने लगे।
तुमको मैं समझा कर आया था, कि सिर्फ चार दिन का तुम्हें वक्त देता हूं।
लेकिन मेरी बातें शायद तुम्हारी समझ में नहीं आती है।
तुम मेरी बातों को फुजूल और बेकार समझती हो।
लेकिन मजबूरन अब मुझे वह काम करना पड़ेगा।
जिसके लिए मैं तुम्हें वार्निंग देकर आया था।
डॉ बख्श अपने दिल में सोच रहे थे।
हालांकि मैं तुम्हारी फैमिली को कोई नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा।
सिर्फ तुम्हें डराने के लिए मुझे यह कदम उठाना पड़ेगा। ताकि तुम अपनी फैमिली को इस तरह से परेशान होता हुआ देखो।
मुझसे शादी करने के लिए तैयार हो जाओ।
डॉक्टर बख्श की सोच एक अलग तरह की थी।
इस वक्त वह जो काम कर रहे थे।
वह उनकी डिक्शनरी में कहीं से कहीं तक मौजूद नहीं था।
लिहाजा उन्हें इसके सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं नजर आ रहा था।
क्योंकि खुद उनकी मॉम ही उनके साथ नहीं दे रही थी?
फिर उन्हें ही अपने लिए सब कुछ करना था।
तभी डॉक्टर बख्श के फोन पर किसी का एसएमएस आया।
वह लोग जस्ट अभी कार में बाहर निकले हैं।
मैसेज पर लिखा हुआ था।
ओके ,तुम सिर्फ हल्का सा अपनी गाड़ी से उनकी गाड़ी को टक्कर मारना।
यह बात ध्यान रखना कि किसी को भी ज्यादा चोट ना लगे।
सिर्फ हल्की-फुल्की खिराश लगना चाहिए।
उन्होंने कहा।
डॉक्टर बख्श ने किसी को वापस एसएमएस किया।
दूसरी तरफ से, ओके सर, का एसएमएस आ चुका था।
डॉक्टर बख्श ने फोन का नेट ऑफ कर दिया।
सॉरी मिस, मगर मेरे लिए यह करना बहुत ज्यादा जरूरी था।
क्योंकि तुम्हारी समझ में मेरी सीधी साधी बात नहीं आ रही है?
उन्होंने उसे लड़की का तसव्वुर करते हुए दिल में
कहा।

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