कन्दील/ Kandil | part-2
कंदील part -2
यहां कन्दील अपनी जिंदगी में होने वाले बदलाव से बेखबर। बहुत आराम की नींद सो रही थी। उसे तो पता भी नहीं था कि उसकी जिंदगी में आगे क्या होने वाला है?
लाएबा उसे जगाने आई तो उसने देखा इस वक्त कंदील के चेहरे पर बहुत प्यारी स्माइल थी।
बहुत सुकून से ख्वाबों की दुनिया में सो रही थी हो। लाएबा कुछ सेकंड रुक उसकी स्माइल को देखने लगी।
कंदील के होंठ के पास का दिल उसकी स्माइल को और कातिल बना था।
लाएबा कंदील को देखकर मुस्कुराने लगी। और खिड़की की तरफ जाकर वहां से उसने पर्दों को हटाया। लाएबा ने जैसे ही पर्दों को हटाया। सूरज के करणे कंदील के चेहरे पर पड़ने लगी।
और कंदील की आंखें खुलना लगी।
उठ जाइए कंदील बीवी सुबह हो गई है आप लेट हो जाएंगी हॉस्पिटल जाने के लिए। लाएब ने कंदील के सर पर हाथ फिराते हुए कहा।
जब तक आप इस हवेली में मौजूद है लाएबा तब तक मैं अपने किसी काम के लिए लेट नहीं हो सकती। कंदील ने मुस्कुराते हुए लाएबा की तरफ देखकर कहा। और अपने बिस्तर से उठकर बैठ गई।
ओ मोहतरमा तो यह बात है।
लाएबा कंदील के कंबल को तय करते हुए बोली।
और जब इस हवेली से चली गई तो फिर क्या करोगी? लाएबा ने कहा।
मैं भी इस हवेली से चली जाऊंगी।
कंदील ने अपनी आंख को दबाते हुए कहा।
ओके मैडम मस्ती करना बंद करो। तुम्हें पता है नवाब साहब नाराज हो जाते हैं अगर कोई भी नाश्ते के लिए लेट पहुंचे तो।
उठो और जल्दी से फ्रेश होकर नीचे आ जाओ सब तुम्हारा वेट कर रहे हैं। लाएबा ने वार्निंग भरे लहजे में कंदील की तरफ देखते हुए कहा।
ओके लाएबा मैं बस 10 मिनट में रेडी होकर नीचे आती हूं।
कंदील ने मुस्कुराते हुए लाएबा की बात का जवाब देकर कहा। और वॉशरूम में घुस गई।
सभी एक साथ ड्राइंगटेबल पर मौजूद थे नाश्ते के लिए हैं। और खामोशी से नवाब साहब को देख रहे थे।
क्योंकि आज नवाब साहब बहुत ज्यादा सीरियस नजर आ रहे थे?
हवेली के हर एक शख्स को लग रहा था नवाब साहब के दिमाग में कोई बात चल रही है। जो उन्हे बहुत परेशान कर रही है।
मगर पूछने की हिम्मत किसी शख्स में नहीं थी। क्योंकि यहां पर फैसला सुलाने वाले सिर्फ नवाब साहब थे? सभी नवाब साहब की बातों को आंखें बंद करके मान लिया करते थे।
अभी किसी ने नाश्ता करना स्टार्ट नहीं किया था क्योंकि कंदील अभी डाइनिंग टेबल पर मौजूद नहीं थी? और नावाब साहब के रूल्स के हिसाब से कोई भी एक शख्स अगर हवेली का काम होगा। तो खाना स्टार्ट नहीं किया जा सकता।
नवाब साहब ने बहुत गौर से एक नजर। यहां बैठे सारे लोगों पर डाली। और फिर घड़ी की तरफ देखने
लगे।
तभी उनकी नजर सीडीओ पर पड़ी जहां से कंदील नीचे उतर रही थी।जिसे देखकर उनके सीरियल चेहरे पर स्माइल आ गई।
कंदील बहुत ही सालिके से सर पर दुपट्टा ओढ़े हुए थे? उसके चेहरे पर हल्की से स्माइल थी। वह आहिस्ता आहिस्ता चलती हुई नवाब साहब के नजदीक आई। और उनके कंधे से टीककर। उन्हें सलाम किया।
नवाब साहब ने। कंदील के सर पर अपना हाथ फेरा। और उसके सलाम का जवाब देते हुए।
अपने नजदीकी उसे बैठने को कहा। हमेशा से ही कंदील नवाब साहब के नजदीक बैठती थी।
कंदील ने कुर्सी पर बैठकर। बाकी सब लोगों की तरफ देखते हुए उन्हें भी सलाम किया। बाकी सब लोगों ने भी कंदील के सलाम का। मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
और अब सबकी नजर नवाब साहब पर टिकी हुई थी। क्योंकि सबसे पहले नवाब साहब?
खाने का एक लुकमा अपने मुंह में रखते थे। उसके बाद ही बाकी सब लोग खाना खाते थे।
नवाब साहब ने जैसे ही खाने का लुकमा में अपने मुंह में रखा। फिर यहां पर बैठे हुए जितने लोग थे। उन्होंने भी खाना स्टार्ट कर दिया।
सब लोग हल्की फुल्की बातो के दरमियान अपना ब्रेकफास्ट कर रहे थे।
कंदील की नजर आगा जान पर गई।
आज आगा जान कुछ बदले हुए नजर आ रहे थे।
आगा जान बहुत जल्दी ही आपको मेरे हॉस्पिटल का उद्घाटन आप को अपने हाथो से करना है।
कंदील ओटस को अपने मुंह मे रखती हुए बोली।
कंदील आगा जान के बिल्कुल नजदीक वाली चेयर पर बैठी थी।
जी हा मेरा बच्चा जरूर हम तो उस पल के कबसे मुन्तजिर है। आगा जान ने कहा।
हमारी बहुत बड़ी ख्वाहिश है कंदील बेटा के तुम्हारा हॉस्पिटल का उद्घाटन हम अपने हाथो से करे।
हमने रहीम से कहकर हॉस्पिटल बनवाने के लिए जमीन भी तालाश कर ली है।
आगा जान ने कंदील को गुड न्यूज सुनाते हुए कहा।
क्या सच मे आगा जान कंदील हैरान होकर बोली।
कंदील के लिए ये खबर बहुत खुशी वाली थी।
जी हा बेटा हमने कफी पहले इस काम को अंजाम देना शुरू कर दिया था।
आगाजान मुतमईन होते हुए बोले।
थैंक्स आगा जान कंदील ने आगा जान का हाथ पड़कर कहा।
यू आर वेलकम बेटा आगा जान अपना दूसरा हाथ कंदील के सर पर रखते हुए कहा।
छोटी और बड़ी ताई अम्मी ,छोटे और बड़े ताया अब्बू
बेगम साहिबा लाएबा और जेबा सब कंदील और आगा जान को देखकर मुस्कोरा ने लगे।
आगा जान आज हॉस्पिटल मे एक सीनियर डॉक्टर आऐ है।
जो अपनी पनिशमेंट के लिए मशहूर है।
कंदील खाते हुए आगा जान से बात कर रही थी।
अच्छा आगा जान ने कहा।
आगा जान का हाथ चम्मच मुंह मे रखते हुए वही रूक गया था।
आगा जान कुछ सोचने लगे थे।
क्या हुआ आगा जान क्या सोच रहे हो आप कन्दील ने जब देखा वो कुछ सोच रहे है।
तो उनसे सवाल किया।
कुछ नही बेटा, बस ये कहना चाहूंगा के अपना काम ईमानदारी से करो।
फिर कोई भी तुम्हे पनिशमेंट नही दे सकता
आगा जान मुस्कुराकर बोले।
कंदील ने भी अपनी गर्दन को हा मे हिला दिया।
कंदील आगा जान की बात का मतलब अच्छी तरह समझ गई थी।
उसको पता था आगा जान का ईशारा किस तरफ था।
कंदील ने एक नजर यहा बैठे हुए सब लोगो पर डाली।
फिर अपना ब्रेकफास्ट करने लगी।
आगा जान की सोच अभी भी जारी थी।

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